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गंगा का जलस्तर स्थिर पर कटान तेज

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रामगढ़/दयाछपरा। गंगा की लहरें सोमवार को मध्यम बाढ़ स्तर के करीब पहुंचकर स्थिर हो गई हैं लेकिन तटीय इलाकों पर बसे लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं। गंगा की लहरों ने ग्रामसभा गोपालपुर के कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान के सामने करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए रीवेटमेंट के कार्य पर धावा बोल दिया है। रिवेटमेंट का कार्य बैठना शुरू हो गया है। रिवेटमेंट के बगल में नदी का कटान तेज हो गया है।
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बाढ़ विभाग बंबू क्रेट विधि का प्रयोग कर नदी की कटान को रोकने का प्रयास कर रहा है, लेकिन सोमवार की दोपहर तक सफलता नहीं मिल पाई है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से गोपालपुर में कन्हैया ब्रह्म बाबा के स्थान के बगल से उदय छपरा गांव तक करीब 250 मीटर की लंबाई तक रिवेटमेंट का कार्य कराया गया था। विभाग ने कन्हैया ब्रह्म बाबा के स्थान के पीछे से लेकर दुबे छपरा अनुसूचित बस्ती तक खाली छोड़ दिया था। कुछ हिस्सों में पार्कोपाइन विधि द्वारा कार्य कराया गया था। खाली स्थान पर गंगा की लहरों ने खंजर चलाना शुरू कर दिया है। कटान की स्थिति को देखकर 10 हजार की आबादी में भय है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी जिस स्थान पर कटान कर रही है, वहां से गोपालपुर बस्ती महज 50 मीटर की दूरी पर है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार, गंगा का जलस्तर सोमवार की शाम चार बजे 58.520 मीटर पर था। पानी में हल्का घटाव शुरू हो गया था। इधर, गंगा का पानी तो स्थिर है। फिर भी दुबे छपरा गांव को पूर्ण रूप से घेर लिया है। अगर थोड़ा भी पानी बढ़ा तो ग्रामसभा के रास्ते बंद हो सकते हैं। सिंचाई विभाग के बंधे के रास्ते आकर बाढ़ का पानी पुरानी चिमनी तक पहुंच कर खेतों को डुबाना शुरू कर दिया है। अब यह पानी टेंगराही हनुमान मंदिर तक जाने के बाद गांव में पहुंचना शुरू हो जाएगा।
बाढ़ विभाग मौन, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
रामगढ़। गंगा की लहरें सोनार टोला रामगढ़ में करीब चार करोड़ रुपए की लागत से कराए गए रिवेटमेंट के कार्य को अपने पेटे में समाहित करने को आतुर है। लालबाबू सोनार, जवाहर सोनार, अजय सोनार, विजय सोनार के घरों पर ठोकर मारना शुरू कर दिया है। ग्रामीण अपने घरों से सामानों को निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे हैं। बाढ़ विभाग के मौन होने के कारण पूरे परिवार के लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने हाथों से बोल्डर व पेड़ों की टहनियों को काटकर गंगा की बैकरोलिंग धारा को मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि बरसों से पाई पाई जुटाकर बनाए गए अपने घरौंदे को बचा सके। उनका कहना है कि बाढ़ विभाग से गुहार लगाते थक गए। मजबूर होकर आज अपने ही हाथों अपने घरों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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नौरंगा में स्थिति भयावह, तेजी से हो रहा कटान
बैरिया। गंगा उस पार उत्तर प्रदेश के अंतिम गांव नौरंगा में कटान की स्थिति भयावह हो गई है। गंगा तेजी से गांव की तरफ कटान कर रही है। अब महज 15 मीटर की दूरी पर रह गई है। कटान की स्थिति यही रही तो अगले तीन-चार दिनों में नौरंगा के दर्जनों मकान गंगा में विलीन हो जाएंगे। भारी नुकसान होगा। बाढ़ विभाग मौके से गायब है। कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्थिति का जायजा लेने मौके पर नहीं पहुंचा है। पिछले वर्ष कटानरोधी कार्य शुरू हुआ था लेकिन बाढ़ विभाग ने उसे आधा अधूरा छोड़ दिया था। वहां मिट्टी भरवाने के लिए ग्राम प्रधान सुरेंद्र ठाकुर ने डेढ़ माह पूर्व जिलाधिकारी और बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र सौंपकर कहा था कि काम को पूरा करा दीजिए अन्यथा मुझे अनुमति प्रदान करें। अधिकारियों ने न तो कार्य स्वयं कराया, न ही प्रधान को परमिशन दी। राधेश्याम ठाकुर, विनोद ठाकुर, बलिंद्र ठाकुर, श्रीकांत यादव, अवधेश ठाकुर, रामजी ठाकुर और भुवाली ठाकुर सहित दर्जनों लोगों का आशियाना कटान की जद में है। अपने परिवार को इन घरों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। सोमवार को दोपहर तक गांव के 25 फुट अंदर तक बाढ़ का पानी घुस गया है।
गंगा उस पार नौरंगा की स्थिति सामान्य है। हमारा लेखपाल मौके पर मौजूद है। उसके द्वारा किसी भी तरह के खतरा की सूचना मुझे नही दी गई है। - आत्रेय मिश्र, उपजिलाधिकारी बैरिया
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