बलिया। जिला में मलेरिया डेंगू से जंग में मच्छरों के आगे सिस्टम हार गया है। स्थानीय निकाय हो या फिर मलेरिया उन्मूलन विभाग सभी मच्छरों को शिकस्त देने में कामयाब नहीं हो पा रहे। मलेरिया डेंगू के मरीज सामने आने लगे हैं। ऐसे में मच्छरों से बचने के लिए लोग बाजार से क्वाइल, इलेक्ट्रिक डिवाइस, क्रीम, अगरबत्ती, फिनायल, मच्छर मारने की दवा, मच्छरदानी आदि खरीद रहे हे। जिससे लोगों पर खर्च का बोझ बढ़ गया है। जिले के लोग करीब 20 लाख रुपये एक माह में इन सामान पर खर्च कर रहे है। जबकि निकायों और ग्राम पंचायतों द्वारा इस छिड़काव में रुचि नहीं ली जा रही है।
मच्छरों की रोकथाम की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों, मलेरिया विभाग की रहती है। जिले में 10 स्थानीय निकाय है। इन निकायों व मलेरिया विभागों के द्वारा 20 से 25 लाख रुपये मच्छरों की रोकथाम के लिए दवा छिड़कने के नाम पर खर्च किए जाते है। इस साल भी इन विभागों के द्वारा दवा छिड़काव के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ये दावे फेल साबित हो रहे है। इस समय मच्छरों की काफी भरमार है। शहर से लेकर गांव देहात तक के लोग मच्छरों से परेशान है। मच्छरों के प्रकोप के चलते बीते दिनों दो मरीज डेंगू पीडि़त निकल चुका है। जबकि मलेरिया के भी एक मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में इन बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है।
निकायों द्वारा छिड़काव आदि में रुचि कम ली जा रही है। हालांकि मलेरिया विभाग ने वार्ड वार छिड़काव कराया जा रहा है।
- सुनील यादव, जिला मलेरिया अधिकारी, बलिया