बलिया। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इस चुनाव के साथ ही सभी दल विस चुनाव में अपनी तैयारियों को भी परख रहे थे। विस चुनाव से पहले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव जिस तरीके से पुराने साथियों की पार्टी में वापसी कर मजबूती से चुनाव लड़ने का संकेत दे रहे थे, जिपं अध्यक्ष चुनाव में आजमगढ़ और बलिया में ‘समाजवादी किले’ को संभाल कर सपाइयों ने उनकी तैयारी को और धार प्रदान किया है। इस जीत ने जहां पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी की सपा में जल्द ही धमाकेदार वापसी तय कर दी है।
पूर्वांचल के जनपदों में आजमगढ़ और बलिया को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में बलिया में तो पांच सीटों पर भाजपा ने अपना कब्जा जमा लिया था, लेकिन सपाइयों ने आजमगढ़ में भाजपा को मात्र एक सीट पर रोककर अपने गढ़ को बचाने में कामयाबी हासिल की थी। फिर भी उसे 2017 के चुनाव में 10 में पांच सीटें ही मिली थी। 2012 को चुनाव में सपा के पास जनपद की नौ सीटें थीं। त्रिस्तरीय पंचायत और आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अखिलेश यादव ने एक रणनीति के तहत पार्टी से दूर हुए जनाधार वाले नेताओं की वापसी का जो रास्ता खोला, इसका सीधा फायदा सपा को मिलता दिखाई दे रहा है। आजमगढ़ में रमाकांत यादव, दरोगा सरोज आदि की वापसी से सपा को काफी मजबूती मिली है। इसका नतीजा रहा कि आजमगढ़ में तो सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री दुर्गा यादव के पुत्र विजय यादव ने एकतरफा जीत दर्ज कर इतिहास ही रच डाला। 84 सदस्यों वाली इस सीट पर सपा ने 79 मत प्राप्त किए। इस जीत से ये तय की सपा 2012 वाले रसूख को हासिल करने में कोई कोर कसर छोड़ने वाली नहीं है। वहीं, बलिया में भी शानदार जीत ने बसपा छोड़ने वाले पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी की सपा में धमाकेदार वापसी का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। सियासी पंडितों की माने तो आने वाले दिनों में जल्द ही इसकी घोषणा हो सकती है।