जबकि सच्चाई यह है कि लिपिक दीपक गुप्त के उपर आईपीसी के विभिन्न धाराओं के तहत कोर्ट के आदेश पर सिकंदरपुर थाने में बीते दो फरवरी को मुकदमा दर्ज किया गया था। लेकिन पुलिस की उदासीनता के कारण गिरफ्तारी नहीं हो रही थी। जब डीजी के निर्देश पर उसे चौकी इंचार्ज ने उठा लिया तो एसओ उसे हिरासत बताकर मानो कानून से अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं।
गौरतलब हो कि कस्बा के मुहल्ला बढ्ढा निवासी रामजी वर्मा पुत्र सूर्यदेव वर्मा ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में शिकायती पत्र देकर कस्बा स्थित लक्ष्मी गैस एजेंसी के खिलाफ गैस वितरण में धांधली व फर्जी गैस कनेक्शन वितरण करने की शिकायत की थी। जिस पर कोर्ट के आदेश पर दो फरवरी 2015 को सिकंदरपुर थाने में एजेंसी लिपिक दीपक गुप्त के विरूद्ध आईपीसी एक्ट 419, 420, 467, 468, 471, 408, 409, 120बी के तहत मुकदमा कायम किया गया था। लेकिन पुलिस की उदासीनता कही जाय या फिर राजनीतिक दबाव पुलिस करीब आठ महीने तक उस पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। जब वादी श्री वर्मा ने पुन: कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए दिनांक 21 सितंबर 2015 को पुलिस महानिदेशक लखनऊ को एक प्रार्थनापत्र प्रेषित कर घटनाक्रम से अवगत कराया और गिरफ्तारी की मांग की। जिस पर पुलिस महानिदेशक लखनऊ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाने को अविलंब गिरफ्तारी कर कार्रवाई करने का आदेश दिया। रविवार की दोपहर सिकंदरपुर चौकी प्रभारी मोतीलाल पटेल अपने दलबल के साथ आरोपी को मुहल्ला मिल्की में गैस वितरण करते समय उठा लिया। सिकंदरपुर एसओ संजय द्विवेदी बताया कि इस मामले में चौकी इंचार्ज ने आरोपी को उठाया है। विस्तृत जानकारी हमें नहीं है। जबकि चौकी प्रभारी मोतीलाल पटेल सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसे किसी व्यक्ति को मैंने नहीं उठाया।