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बलिया नगर और बैरिया में नहीं सुलझ रही भाजपा और सपा की गुत्थी

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बलिया। छठे चरण की नामांकन प्रक्रिया शुरू होने बाद भी बलिया नगर और बैरिया विधानसभा में भाजपा और सपा की चुनावी गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही है। इस सीट पर प्रत्याशियों का चयन करने में दोनों प्रमुख दलों को पसीना छूट रहा है। नामों की घोषणा में हो रही देरी ने अन्य दलों के प्रत्याशियों की भी बेचैनी बढ़ा रखी है। उन्हें अपनी रणनीति बनाने में दिक्कत हो रही है।
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बिहार सीमा से सटे जिले की बैरिया और बलिया नगर विधानसभा की उलझन को सुलझाना भाजपा और सपा के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पिछले चुनाव में भाजपा दावेदारों में टिकट के लिए मची खींचतान का हल पार्टी ने कुछ ऐसा निकाला जो सबको हैरान करने वाला था। तब भाजपा ने पुराने दिग्गजों को किनारे कर युवा चेहरा आनंद स्वरुप शुक्ल पर दांव लगाया था, जो सफल भी रहा था। तब सपा ने अपने कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नारद राय का टिकट काट कर युवा चेहरा व नपा के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मण गुप्ता को मैदान में उतारा था, लेकिन वोटरों ने सपा की बजाए भाजपा को तरजीह दी थी। लेकिन इस चुनाव में यही भाजपा के गले की हड्डी साबित हो रहा है। इस बार कई युवा चेहरे भी पार्टी से टिकट मांग रहे है। पिछले चुनाव में यह प्रयोग भले ही सफल रहा हो, लेकिन इस बार भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। भाजपा के कई नेता इस सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं, जिससे इस सीट पर टिकट की घोषणा करने में पार्टी को पसीने छूट रहे है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो एक अदद टिकट के लिए दो दलों के दर्जन भर दावेदारों की खींचतान में बलिया नगर की सियासत उलझी हुई है।
कमोबेश यही हाल बैरिया विधानसभा का भी है। यहां भाजपा और सपा दोनों दलों में टिकट के लिए लंबी फेहरिस्त है। कोई जाति के आधार पर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है तो पुराने रिकार्ड को आगे करके टिकट मांग रहा है। भाजपा से विधायक सुरेंद्र सिंह के अलावा करीब आधा दर्जन उम्मीदवार टिकट के लिए लखनऊ में डेरा डाले है तो सपा में भी दावेदार की लंबी कतार हैं। सपा में टिकटों के लिए मजबूत दावेदारों के बीच चल रही इस रस्साकशी से पार पाना पार्टी आलाकमान के लिए आसान है। भाजपा की तरह सपा भी भंवरजाल में फंसी हुई नजर आ रही है। दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को लेकर कोई स्थिति स्पष्ट न होने से क्षेत्र में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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