एडीआर (वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र) पद्धति जीवन रक्षक का काम करती है।
इस पद्धति के द्वारा ज्यादा से ज्यादा मुकदमों को सुलझाया जाय। यह बहुत
अच्छी पद्धति है।
यह बात रविवार को दीवानी न्यायालय परिसर में नवनिर्मित
वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र के लोकार्पण के अवसर पर आयोजित समारोह को
संबोधित करते हुए उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति राकेश तिवारी ने
कही।न्यायमूर्ति तिवारी ने कहा कि आपसी सुलह-समझौते से विवादों का
निपटारा दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होता है।
मध्यस्थता के जरिए दोनों
पक्षों यह पद्धति आपस में मेल करा देता है। इस पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता
यह है कि इसमे दोनों पक्षों की ही जीत होती है और दोनों पक्ष हंसते
मुस्कुराते हुए अपने घर जाते है। इसके पूर्व न्यायमूर्ति श्री तिवारी ने
नवनिर्मित वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र भवन का लोकार्पण किया।
इस दौरान
वैदिक मंत्रोच्चार के विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इस मौके पर उप्र
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति राकेश
तिवारी ने एडीआर भवन का निरीक्षण किया। सिविल कोर्ट परिसर में पहुंचते पर
हरिशंकर प्रसाद विधि महाविद्यालय के विधि के छात्र/छात्राओं ने न्यायमूर्ति
का फूल माला से स्वागत किया।
जनपद न्यायाधीश चंद्रहास राम ने बताया कि
एडीआर भवन के निर्माण के लिए 79.9 लाख आवंटित हुआ था। उन्होंने सभी आगंतुक
अतिथियों का स्वागत करते हुए कहाकि इस एडीआर पद्धति से समय के साथ ही कम
खर्च में दोनों को त्वरित न्याय की मंशा पर भी प्रकाश डाला।
इस मौके पर
उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव तेज प्रताप तिवारी, जिलाधिकारी
शरद कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झां, एडीजे मनोज कुमार राय,
सीजेएम एसएन सिंह, अश्वनी कुमार सिंह सहित सभी न्यायिक अधिकारी एवं
कर्मचारी मौजूद रहे। इसका संचालन अपर जिला जज डीपीएन सिंह ने किया।