समाजवाद के पुरोधा एवं संपूर्ण क्रांति के अग्रज रहे जयप्रकाश नारायण के पैतृक निवास जयप्रकाशनगर में जेपी आंदोलन की यादों को ताजा रखने के लिए उनकी वस्तुओं को सहेजकर रखा गया है। जेपी के कमरे में उनका पलंग, बनियान, छड़ी, चप्पल, घड़ी आदि सुरक्षित है। यह वही स्थान है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपनी कर्मभूमि मानकर सजाने संवारने का काम जिम्मेदारी से किया।
जयप्रकाशनगर स्थित जेपी ट्रस्ट के व्यवस्थापक एवं प्राचार्य अशोक कुमार सिंह, राघव प्रसाद सिंह, रामधनी सिंह, भरत यादव, आनंद बिहारी सिंह आदि बताते हैं कि आजादी के बाद जेपी के आंदोलनों में संपूर्ण क्रांति सबसे अहम थी। लेकिन दुखद यह कि वर्ष 1974 में जेपी जो हुजूम लेकर सड़कों पर निकले, उसमें से अधिकांश हुजूम के साथियों की समझ से परे थी संपूर्ण क्रांति। जेपी सेवा के माध्यम से समाज में बुनियादी बदलाव लाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कई प्रयोग किए। 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन, चंबल के बागियों के बीच सत्य अहिंसा का अलख, भूदान, ग्राम दान, जनेऊ तोड़ो आंदोलन, उनके सक्रिय जिंदगी के महत्वपूर्ण बिंदु रहे। कहा कि 1974 का संपूर्ण क्रांति आंदोलन उनके प्रयोगों की आखिरी कड़ी बनी। तब अपने ही देश में तानाशाही के विरुद्ध इस 75 वर्षीय बुर्जुर्ग को मैदान संभालना पड़ा। उनके प्रयोगों से 1977 में सत्ता परिवर्तन हुआ। कहा कि इस अवधि में जेपी इंतजार करते रहे कि उनके अनुयायी संपूर्ण क्रांति के सपनों को साकार करेंगे। लेकिन नए शासकों ने उनकी जिंदगी में ही वही खेल शुरू कर दिया, जिसके विरुद्ध 1974 में आंदोलन चला था। अब तो जेपी कुछ करने की भी स्थिति में भी नहीं थे। वे पूरी तरह टूट चुके थे। देश और समाज की बेहतरी का अरमान लिए जेपी आठ अक्तूबर 1979 को इस लोक से ही विदा हो गए।
जेपी ट्रस्ट स्मारक की हुई सफाई
जयप्रकाश नगर। जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि के मद्देनजर उनके पैतृक आवास, वर्तमान समय में जेपी ट्रस्ट स्मारक के एक-एक कोने व उनके सामान की सफाई जेपी ट्रस्ट के व्यवस्थापक अशोक कुमार सिंह की देखरेख में कराया गया। उन्होंने बताया कि आठ अक्तूबर को पुण्यतिथि मनाई जाएगी।