बलिया। कार्यदायी संस्था पर धांधली के आरोप लगने के बाद एसआईटी जांच जांच में फंसे जिले के दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण जल्द पूरा होने की उम्मीद जगी है। बसपा सरकार में बनने शुरू हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण पूरा करने के लिए शासन ने पुनरक्षित बजट स्वीकृत कर दिया है। इस बजट का अधिकांश हिस्सा कार्यदायी संस्था को जुर्माने के रूप में चुकाना होगा। दोनों सीएचसी का निर्माण पूरा करने में कार्यदायी संस्था को अपने 4.10 करोड़ रुपये लगाने पड़ेंगे, जबकि स्वास्थ्य विभाग 22.91 लाख रुपये ही खर्च करेगा।
वर्ष 2008-09 में बसपा सरकार के दौरान जनपद के मनियर (रिगवन) और चिलकहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण शुरू किया गया था। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम आजमगढ़ को मिली थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर का निर्माण 3.70 और चिलकहर का निर्माण 2.72 करोड़ से होना था। पूरी धनराशि भी जारी कर दी गई थी। इसमें मुख्य इमारत के साथ ही आवासों का निर्माण भी शामिल था। निर्माण पूरा होने से पहले कार्यदायी संस्था पर धांधली और अनियमितता के आरोप लगने लगे। ये आरोप पूरे प्रदेश में बन रहे 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर लगे थे। इसके बाद मामले में शासन से एसआईटी जांच बिठा दी गई और इन स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण पर ब्रेक लग गया। मनियर(रिगवन) की मुख्य इमारत तो हैंडओवर ले ली गई, लेकिन आवास वैसे ही अधूरे रहे। चिलकहर में निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। एसआईटी जांच पूरी होने के बाद शासन की ओर से कार्यदायी संस्था की ओर से प्रस्तुत की गई पुनरक्षित लागत को स्वीकृत कर लिया गया है। सीएचसी मनियर की लागत अब 5.19 करोड़ और चिलकहर की लागत 5.56 करोड़ हो गई है। मनियर में परियोजना को पूरा करने में कार्यदायी संस्था 1.45 करोड़ और स्वास्थ्य विभाग 4.29 लाख खर्च करेगा। वहींचिलकहर के भवन को पूरा करने के लिए 2.65 करोड़ कार्यदायी संस्था और 18.62 लाख स्वास्थ्य विभाग खर्च करेगा।
इससे पहले शासन की ओर से एसआईटी जांच पूरी होने के बाद जनपद की तीन पीएचसी खंदवा, फरसाटार और इंदरपुर का निर्माण पूरा करने के लिए पुनरक्षित बजट को स्वीकृत किया गया था। उसमें भी कार्यदायी संस्था पर जुर्माना लगाया गया था।