जिला जेल में बुधवार की देर रात कई आपत्तिजनक वस्तुएं मिलने के बाद शुक्रवार की दोपहर डीआईजी जेल आरपी सिंह जांच करने पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ जेल अधीक्षक से पूछताछ की बल्कि परिसर का गहनता से निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्वीकार किया कि जेल कर्मियों से लापरवाही हुई है।
इस प्रकरण की जांच चल रही है जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि बलिया और आजमगढ़ के जिला कारागार में सीसीटीवी कैमरा और जैमर लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
जिला कारागार में बुधवार की रात डीएम और एसपी के औचक निरीक्षण में 13 मोबाइल, आठ चार्जर, तीन सिम, 25 ग्राम गांजा, चिलम, दो चाकू, ब्लेड आदि आपत्तिजनक सामान मिलने के बाद जेल की अंदरूनी व्यवस्था की पोल खुल गई थी। शासन को इसकी रिपोर्र्ट भेजने के बाद डीआईजी जेल आरपी सिंह शुक्रवार को जिला कारागार पहुंचे।
उन्होंने इस बाबत जेल बंदीरक्षकों और अधिकारियों से पूछताछ की। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने माना कि जेल कर्मियों की लापरवाही से ही आपत्तिजनक सामान जेल में पहुंचे। मानक के अनुरूप जेल में बंदी रक्षकों एवं डिप्टी जेलरों की तैनाती न होना भी गड़बड़ी का प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा कि जेल अधिकारियों को और सतर्क रहने की जरूरत है। जेल में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की निगरानी होनी चाहिए, चाहे वह बंदी रक्षक ही क्यों न हो? उन्होंने कहा कि हम सभी कर्मचारियों को पाक-साफ नहीं ठहरा सकते। कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है, तभी जेल के अंदर आपत्तिजनक सामान पहुंच रहा है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जेल में आपत्तिजनक पहुंचने के पीछे यहां के कर्मचारी दोषी हैं। जेल प्रशासन से निश्चित रूप से भारी चूक हुई है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि जेल में जैमर और सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए शीघ्र ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रदेश के 10 जिलों में जैमर और सीसीटीवी लगाए गए हैं। अगले सत्र में बलिया और आजमगढ़ के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिला जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं। 339 की जगह जेल में 692 कैदी रखे गए हैं। चार डिप्टी जेलर की जगह मात्र एक डिप्टी जेलर की तैनाती है। अगर वो दिन में ड्यूटी करेगा तो रात में उसके लिए काम करना संभव नहीं है। अधिकारियों की रात में तैनाती न होने से ये समस्या आई है।