इस मौके पर प्रांतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री कामरेड आलोक बनर्जी ने कहा कि दवा कंपनिया युवा दवा प्रतिनिधियों का शोषण करती हैं। करोड़ों रुपए कमाने के बाद भी उनका पेट नहीं भरता। इस अवसर पर एक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि यूपी, उत्तराखंड के साथियों के शानदार भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया। दवा प्रतिनिधियों का न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपए प्रतिमाह, सरकारी अस्पतालों में बेरोक टोक काम करने का अधिकार की मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि उप्र सरकार से दो दौर की वार्ता हो चुकी हैं। अगर सरकार नहीं सुनती हैं तो और अधिक तीव्र आंदोलन चलाया जाएगा। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष आरके श्रीवास्तव, शमीर भट्टाचार्य, संजय नारंग, सतीश चौबे, ने सभा को संबोधित किया। प्रदेश के महामंत्री हमेंत ङ्क्षसह एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष डीडी चौधरी ने अपना प्रतिवेदन पटल पर रखा और 20 सितंबर को बहस कराने का निर्णय लिया गया। इस मौके पर मनोज श्रीवास्तव, सुबोध अवस्थी, सुब्रतो बनर्जी, शेषनाथ तिवारी, आरएन राय, सीके पाठक, प्रताप यादव आदि मौजूद रहे।