हजारी प्रसाद द्विवेदी, केदारनाथ सिंह जैसे शिक्षाविद परिषदीय विद्यालयों से ही पढ़ाई किए थे। आज शिक्षक आलोचना का पात्र बना है। शिक्षक अपने दायित्व को भूल चुका है।
हम गुरु हैं, यह अनुभव प्राथमिक शिक्षकों में क्यों नहीं है। प्राथमिक शिक्षक के लिए ही गुरु शब्द है और किसी के लिए नहीं। जब तक यह शिक्षक वर्ग महसूस नहीं करेगा, तब तक कितना भी लच्छेदार भाषण कर लें, उससे शिक्षा उन्नयन संभव नहीं होगा।
यह बात प्रदेश के बेसिक शिक्षामंत्री रामगोविंद चौधरी ने बुधवार को शिक्षा क्षेत्र नगरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय कसेसर के प्रांगण में शिक्षक उन्नयन गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि बलिया क्रांतिकारियों की धरती है, तो बलिया के गुरुजनों को भी शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी होना चाहिए। लेकिन शिक्षक अपने नैतिक जिम्मेदारी से दूर हैं,
वे अपने अंदर पहले झांक कर देखें, तो इसका एहसास हो जाएगा। कहा कि मंत्री रहते आप शिक्षकों की सभी परेशानी दूर करने को तैयार हूं, लेकिन हमारी प्रतिष्ठा बचाने के लिए आप शिक्षकों को ईमानदारी से
अपना कर्तव्य निभाना होगा। खोई हुई परंपरा को लाने के लिए क्रांति की जरूरत है, जिसे शिक्षक ही ला सकता है। जिस दिन शिक्षक समझ जाएंगे कि वे गरु हैं, तो कान्वेंट स्कूल बेकार हो जाएंगे।
कहा कि उर्दू शिक्षकों की कठिनाइयों को दूर कर दिया है और पौने दो लाख से अधिक लोगों को नौकरी दी है। जब तक शिक्षक स्कूल जाकर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं देंगे,
तब तक अभिभावक परिषदीय विद्यालयों पर विश्वास नहीं करेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित तथा पुष्प अर्पित करने के साथ हुआ। इस मौके पर विधायक गोरख पासवान, बैरिया विधायक जेपी अंचल, जितेंद्र सिंह, त्रिवेणी, राणा प्रताप सहित शिक्षक मौजूद रहे। अध्यक्षता कोमल यादव तथा संचालन विद्या सागर तिवारी ने किया।