बलिया। सरकार द्वारा लाई गई पेंशन की नई व्यवस्था यूनीफाइड पेंशन सिस्टम को अटेवा के जिला संयोजक समीर कुमार पांडेय ने महाधोखा बताया है। कहा कि पुरानी पेंशन ऐसी सामाजिक सुरक्षा है, जिसमें कर्मचारियों का मान, सम्मान एवं स्वाभिमान सुरक्षित होता है। जबकि एनपीएस बाजार आधारित पेंशन व्यवस्था है, जो निश्चित नहीं है। इससे इत्तर यूपीएस में 50% पेंशन डीए के नाम पर निश्चितता तो दी जा रही पर इसमें कर्मचारियों की पूरे जीवन की कटौती को ही हड़पने की योजना है। क्योंकि कहा जा रहा कि रिटायरमेंट के पश्चात केवल अंतिम 6 महीने की सेलरी एक मुश्त दी जाएगी तो बाकी पैसा कहां जाएगा। साथ ही जिन कर्मचारियों की नौकरी 25 साल से कम होगी उन्हें उसी अनुपात में कम पेंशन मिलेगी। कहा कि कर्मचारियों के लिए तय होता है कि 10 वर्ष पर 10 हजार पेंशन, लेकिन माननीयों का कार्यकाल पूरा न हो तो भी उनके पेंशन में कोई कमी नहीं होती। कहा कि सरकार द्वारा बार बार बदलने वाली बाजार आधारित अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ अटेवा का संघर्ष जारी रहेगा।
उधर, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. घनश्याम चौबे ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम को शिक्षक व कर्मचारियों के साथ छलावा बताते हुए कहा कि हम शिक्षक व कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से कम कुछ भी मंजूर नही है। कहा कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम बड़े पूंजीपतियों और औद्योगिक घरानों को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाने वाला प्लान है। यदि अर्थशास्त्री दृष्टिकोण से समीक्षा की जाए तो यूनिफाइड पेंशन स्कीम पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली पेंशन प्लान है और यह शिक्षक कर्मचारियों के साथ धोखा है। शिक्षक /कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के सिवाय कुछ भी मंजूर नहीं है और पुरानी पेंशन बहाली तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।