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UP: दहेज नहीं मिला तो विवाहिता को मारते थे ताने, तंग आकर लगाया फंदा; पति को सात साल का कारावास

Thu, 14 May 2026 06:01 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Ballia News: बलिया की अदालत ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने वाली विवाहिता सोनम मामले में पति राजकुमार को दोषी मानते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने छह हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। मृतका के पिता ने पति और ससुर पर दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।
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प्रताड़ना के आरोपी को कारावास। - फोटो : अमर उजाला
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UP News: दहेज के लिए प्रताड़ित कर विवाहिता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम पुनीत कुमार गुप्ता की अदालत ने पति को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त पर विभिन्न धाराओं में कुल छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर उसे अतिरिक्त दो माह का कारावास भुगतना होगा।

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मामला भीमपुरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार मऊ जिले के हलधरपुर जगदीशपुर निवासी राजू ने अपनी पुत्री सोनम की शादी 23 जून 2020 को हिंदू रीति-रिवाज से बरौली राममंदिर में राजकुमार के साथ कराई थी। शादी के बाद शुरुआती दिनों में दंपती का जीवन सामान्य रूप से चलता रहा और उनके दो बच्चे भी हुए। परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन कुछ समय बाद पति राजकुमार और ससुर चंद्रमा द्वारा दहेज की मांग को लेकर सोनम को प्रताड़ित किया जाने लगा।

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मृतका के पिता ने दी थी तहरीर

परिजनों का आरोप था कि अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर सोनम को मानसिक और शारीरिक रूप से लगातार परेशान किया जाता रहा। प्रताड़ना इस हद तक बढ़ गई कि 12 नवंबर 2024 को सोनम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मृतका के पिता राजू ने भीमपुरा थाने में पति और ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अदालत में विस्तृत बहस की गई। गवाहों के बयान, साक्ष्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पति राजकुमार को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, मामले में ससुर चंद्रमा के संबंध में अदालत का फैसला अलग से विचाराधीन बताया जा रहा है। अदालत के इस फैसले को दहेज प्रताड़ना के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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