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लक्ष्य हुआ कम, बदलते नियमों से किसान हुए बेदम

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बलिया। धान खरीद इस वर्ष पूरी तरह तमाशा बन कर रह गया। अब खरीद की तिथि समाप्ति की ओर है, लेकिन आज भी हजारों किसानों का पंजीकरण के बावजूद खरीद नहीं हो पा रहा है। इस बार लगातार नियमों में बदलाव के कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि बिचौलिए अपना खेल करते रहे। हालांकि शासन की ओर से जिले के लक्ष्य में 26400 मी. टन कम लक्ष्य कर दिया गया है। अब जिले का लक्ष्य 98 हजार मी. टन के सापेक्ष 94080 मी. टन की खरीद हुई है। इतना ही नहीं करीब 40 फीसदी क्रय केंद्र भी बंद हो गए हैं। सात दिनों में करीब पांच हजार किसानों से धान की खरीद की जानी है।
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जिले के किसानों के धान खरीदने के लिए एक नवंबर से विभिन्न संस्थाओं के कुल 80 क्रय केंद्र स्थापित किए गए। शासन की ओर से कुल 124400 मी. टन धान खरीद का लक्ष्य किया गया। हालांकि इस वर्ष बारिश व जलभराव के कारण धान की कटाई विलंब से होने के कारण क्रय केंद्रों पर सन्नाटा रहा लेकिन जब किसानों के धान तैयार हुए तो क्रय केंद्रों पर मनमानी शुरू हो गई। जिले में 15 नवंबर से क्रय केंद्रों पर धान पहुंचने लगे और खरीद हुई लेकिन लापरवाही के कारण शुरुआती दौर में ही पांच क्रय केंद्र किन्ही कारणों से बंद हो गए। 75 क्रय केंद्र किसी तरह चले और अब तक धीरे-धीरे 30 क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं। इसमें किसान उत्पादक संगठन तथा पंजीकृत समितियों के केंद्र हैं जो 70 फीसदी किसानों का भुगतान समय से नहीं कर सके। वर्तमान में 43 क्रय केंद्र ही संचालित हो रहे हैं। बताया जाता है कि इस वर्ष क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए कुल 22754 किसानों ने पंजीकरण कराया था। बीते करीब ढाई माह में अब तक 17747 किसानों से कुल 94080 मी. टन धान की खरीद हो सकी है। वर्तमान में तो महज 42 क्रय केंद्र ही संचालित हो रहे हैं। इसमें दो स्थाई क्रय केंद्रों के अलावा पीसीएफ के 17, मार्केटिंग के 20 व मंडी समिति के चार क्रय केंद्र हैं। आलम यह है कि करीब पांच हजार किसान आज भी क्रय केंद्रों का चक्कर काट रहे हैं।
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लगातार हुए नियमों में बदलाव से भी बढ़ी मुश्किलें
इस वर्ष धान खरीद शुरू होने के बाद शुरुआती दौर में किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण के बाद शासन की ओर से ऑनलाइन टोकेन व्यवस्था बंद कर दी गई। जब खरीद शुरू हुई तो इसी बीच फिर ऑनलाइन टोकेन लागू कर दिया गया। इसमें कई बार बदलाव होता रहा जिससे किसान से लेकर अधिकारी तक परेशान रहे।
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किसानों की परेशानी का फायदा बिचौलिए ने उठाया
धान खरीद को लेकर लगातार नियमों में बदलाव व समस्याओं से जूझ रहे किसानों का फायदा इस वर्ष बिचौलिए ने खूब उठाया। कई केंद्रों पर तो किसानों को कई दिनों तक खरीद के लिए इंतजार करना पड़ा तो दूसरी तरफ बिचौलिए कम दामों पर किसानों से धान खरीद कर क्रय केंद्रों पर खपाते रहे।
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कोई धान बेचने को दौड़ रहा तो कोई तौल कराकर भुगतान को काट रहा चक्कर
रेवती। स्थानीय विपणन कार्यालय स्थित धान क्रय केंद्र पर किसानों को इस वर्ष विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों को झेलना पड़ रहा है। पूर्व में किसानों के धानों को खरीदने में काफी हीलाहवाली की गई। धान बेचने को लेकर किसान प्रतिदिन दौड़ते दौड़ते थक गए थे। बाद में किसानों के धरना प्रदर्शन के बाद धान खरीद शुरु हुई। लेकिन अभी भी कई किसान ऐसे हैं जिनकी धान की खरीद नहीं की गई है।
कंचनपुर के अत्रिमुनि पांडेय 52 क्विंटल धान को बेचने के लिए बीते दिसंबर से लगातार क्रय केंद्र रेवती की दौड़ लगा रहे हैं लेकिन उनके धान की तौल अभी तक नहीं हो सकी है। श्री पांडेय का कहना है कि मेरे जैसे कई किसान अभी भी हैं जिनका धान अभी तक खरीदा नहीं जा सका है। उधर, धान बेचने के बाद अंगूठा का निशान नहीं लगने को लेकर दर्जनों किसान परेशान हैं। उनके धानों की तौल तो हो गई है लेकिन प्रभारी विपणन निरीक्षक के द्वारा उनका अंगूठा का निशान नहीं लिया गया है। ऐसे किसान एक-डेढ़ माह से अंगूठा लगाने को लेकर परेशान हैं। किसानों का कहना है कि अंगूठा नहीं लगने पर भुगतान की कोई गारंटी नहीं रहेगी। पचरुखा निवासी सीताराम यादव 40.40, सुदर्शन 29.20, कुसौरी के किसान सुरेंद्र सिंह 56, छितेश्वर यादव 15, जितेंद्र सिंह 17.20, गायघाट के नंद किशोर यादव 23.60, अरुण कुमार सिंह, विजय शंकर सिंह, गोपालजी सिंह आदि धान का तौल करा चुके हैं लेकिन उनका अंगूठा निशान नहीं लिया गया है। किसानों ने बताया कि प्रभारी निरीक्षक बहुत ही कम आते हैं आते भी हैं तो शाम के समय आते हैं और आने के कुछ ही देर बाद निकल जाते हैं। किसानों से मुलाकात नहीं हो पाती। किसानों ने बताया कि करीब 10 दिन पहले उनसे मुलाकात हुई थी उन्होंने कहा कल करा दिया जाएगा लेकिन 10 दिन से आए ही नहीं। इसको लेकर किसानों में रोष है।
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क्रय केंद्रों पर धान की खरीद चल रही है। 28 फरवरी तक धान की खरीद होनी है। अब जिले का लक्ष्य भी कम कर दिया गया है। अब तक अधिकांश किसानों के धान की खरीद हो चुकी है। जो किसान हैं उनके धान की खरीदारी होगी।
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- अविनाश चंद सागरवाल, जिला विपणन अधिकारी, बलिया।
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