बलिया। इस वर्ष आई बाढ़ व लगातार हुई बारिश के चलते जलभराव से बड़े पैमाने पर फसलों की क्षति हुई। गांवों में सर्वे भी हुआ लेकिन अभी तक किसी भी किसान को क्षतिपूर्ति नहीं मिल सकी है।
करीब तीन माह पहले गंगा में आई बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर फसलों की क्षति हुई। कृषि व बीमा एजेंसी ने सर्वे कर 524 गांवों को चिह्नित किया। इसके अलावा सुरहा ताल किनारे वाले 30 गांवों व टोंस नदी से प्रभावित 37 गांवों के फसलों का भी सर्वे किया गया। लेकिन अभी तक इन गांवों के किसानों को क्षतिपूर्ति के तौर पर कोई धनराशि नहीं मिली। बताया जाता है कि फसल बीमा के तहत बीमा एजेंसी प्रीमियम तो लेती है लेकिन फसलों की क्षति होने पर उसका क्षतिपूर्ति भुगतान करने में मनमानी करती है।
उधर, राजस्व विभाग के नियमों को देखें तो एक मौजे के कुल खेती का 50 फीसदी फसलों की क्षति होने पर ही विभाग उस मौजे में फसलों की क्षति मानता है। जबकि धरातल पर कई ऐसे मौजे हैं जहां कुछ हिस्से में फसलों की बर्बादी हुई लेकिन अधिकांश हिस्से की फसलों की कम क्षति हुई। इस ऊहापोह में महीनों बाद भी किसानों को अभी तक कोई बतौर क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं हो सका है। हालांकि बीमित किसानों को बीमा कंपनी की ओर से निर्धारित क्षतिपूर्ति देने की प्रकिया चल रही है।
जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि बीमा एजेंसी व कृषि विभाग की ओर से फसलों का सर्वे कर मुख्यालय का रिपोर्ट भेजी गई है। एक रिपोर्ट राजस्व विभाग को भी भेजी गई है।