उप जिलाधिकारी सदर के निर्देश पर बुधवार को सस्ते गल्ले की दुकान का स्टाक चेक करने हल्दी पहुंचे पूर्ति निरीक्षक को भारी अनियमितता देखने को मिली। चोरी पकड़े जाने से बौखलाए कोटेदार ने पूर्ति निरीक्षक से ग्राम प्रधान व ग्रामीणों के सामने दुर्व्यवहार किया। बंधक बनाए जाने की बात कह कर रोक लिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद निरीक्षक आजाद हो सके।
हल्दी विकास खंड बेलहरी के हल्दी गांव के लोगों द्वारा काफी दिनों से अनियमितता की शिकायत अधिकारियों को दी जा रही थी। इस वजह से उपजिलाधिकारी सदर ने पूर्ति निरीक्षक शैलेंद्र सिंह को स्टाक चेक करने का निर्देश दिया था। निर्देश पाकर बुधवार को हल्दी पहुंचे निरीक्षक ने नंदलाल यादव की दुकान पर गए तो दुकान का ताला बंद था।
चाभी न मिलने पर दुकान को सील कर चले गए। अगले दिन पुन: स्टाक चेक करने पहुंचे तो टोटल 405 बोरी गेहूं चावल की जगह मात्र 201 बोरियां ही मिली। जिस पर कोटेदार ने गांव में दूसरी जगह अनाज होना बताया ।
वहां टीम पहुंची तो 82 बोरियां ही मिली। उसके बाद कोटेदार ने बताया कि बबुरानी गांव में और खाद्यान्न होना बताया गया तो टीम वहां भी पहुंची तो वहां 71बोरी गेहूं व 45 बोरी चावल मिला। एक केंद्र का खाद्यान्न तीन अलग-अलग जगहों पर मिले। बावजूद भी कम ही पाया गया।
पूर्ति निरीक्षक ने बताया कि 405 की जगह 201 बोरियां ही मिली। 204 बोरी बाजार में बेचने के लिए रखा गया था। जिस पर कोटेदार भड़क गया और ग्राम प्रधान शिवजी यादव व ग्रामीणों के मौजूदगी में ही निरीक्षक को बंधक बनाने की बात कहते हुए रोक लिया।
कोटेदार का कहना था कि जिलाधिकारी के आने के बाद पूर्ति निरीक्षक को छोड़ा जायेगा। इसबीच किसी ने हल्दी थानाध्यक्ष को घटना की सूचना दे दी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद निरीक्षक आजाद हुए। उधर, कोटेदार द्वारा निरीक्षक पर बार-बार सुविधा शुल्क लिए जाने का आरोप लगाया जा रहा था।
इनसेट....
मैं स्टाक चेक करने पहुंचा तो स्टाक कम मिला। रेट बोर्ड व अभिलेख सहित अन्य जरूरी कागजात कोटेदार द्वारा नहीं दिखाया गया। मेरे साथ दुर्व्यवहार किया गया और बंधक बनाया गया।
-शैलेंद्र सिंह, पूर्ति निरीक्षक
निरीक्षक सुविधा शुल्क की मांग कर रहे थे। मैंने यह भी कहा कहां से देंगे, कैसे देंगे। लेकिन निरीक्षक अपनी जिद पर अड़े रहे। ऐसे में मेरे पास और कोई दूसरा चारा नहीं था और इसलिए मैंने डीएम साहब के आने का इंतजार किया। ताकि उन्हीं के सामने दूध का दूध और पानी का पानी हो जाय।
- नंदलाल यादव, कोटेदार