बीएसए ने लिया संज्ञान, कृत्रिम अंग और छात्रवृत्ति का भरोसा
रागिनी की कहानी सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने रागिनी को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के साथ ही प्रतिमाह 2000 रुपये की छात्रवृत्ति दिलाने का भरोसा दिया है। रागिनी की कहानी सिर्फ एक दिव्यांग बच्ची के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि उस जिद और हौसले की मिसाल है जो परिस्थितियों से बड़ी होती है। उसके पास चलने के लिए भले ही एक पैर है, लेकिन पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का सपना पूरा करने के लिए उसका हौसला कम नहीं हुआ है। अब जरूरत है कि आश्वासन जल्द हकीकत में बदले और रागिनी को समय पर कृत्रिम अंग व अन्य जरूरी सुविधाएं मिलें। ताकि 400 मीटर का यह संघर्षमय रास्ता उसके सपनों की राह में बाधा न बने।