फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रशासन से टूटी आस, अब खुद पर विश्वास

Sat, 21 Feb 2015 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
बैरिया। कटान जैसी समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन प्रशासन से हथ जोड़ विनती से थक चुके पीड़ित अब स्वयं इसका हल निकालने की पहल की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए बिहार के लाल टोला में 22 फरवरी को यानी आज महापंचायत होगी।
विज्ञापन


इसमें जिले के इब्राहिमाबाद नौबरार और सिताबदियरा के बाशिंदों के साथ ही बिहार के समीपवर्ती कटान प्रभावित गांवों के लोग शामिल होंगे। स्थानीय स्तर पर कोई हल निकालने पर जोर दिया जाएगा।
यूपी-बिहार के शासन तथा प्रशासन की उदासीनता के कारण पिछले कुछ सालों में ही घाघरा ने उपजाऊ जमीन को निगल लिया है। इसके बाद कई गांव और सैकड़ों मकान एक-एक नदी में विलीन होते गए। लोगों का सब कुछ कटान और बाढ़ में तबाह हो गया।
विज्ञापन


बीएसटी बंधे से महज सौ मीटर की दूरी पर घाघरा का कटान रुका हुआ है। समय रहते यदि शासन-प्रशासन नहीं चेता तो दर्जनभर गांव की करीब तीन लाख की आबादी भी घाघरा के कहर से नहीं बच पाएगी।
बिहार सीमा से लगा इब्राहिमाबाद नौबरार में 2011 से घाघरा का कटान शुरू हुआ। पहले किसानों की उपजाऊ भूमि घाघरा विलीन हुई, इसके बाद अब छक्कू टोला, सुफलटोला, नवका टोला विलीन हो गए। इससे 350 लोगों के सपनों का महल घाघरा में विलीन हो गया।

वहीं बिहार के सिताब दियारा के एक दर्जन से अधिक लोगों का मकान भी नदी में समा चुका है। बिहार सरकार ने गत एक वर्ष पहले अपने राज्य के गांवों को बचाने के लिए तीन चरणों में कार्य किया। इसका असर यह हुआ कि जिले के इब्राहिमाबाद की तरफ कटान शुरू हो गया और बिहार का सिताब दियारा क्षेत्र भी जद में आने लगा।

खास बात तो यह है कि जब भी बाढ़ का समय आता है, शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर आश्वासन देते है कि पानी कम होते ही कार्य शुरू हो जाएगा लेकिन बाद में चुप बैठ जाते हैं। इससे अब बीएसटी बंधे से महज सौ मीटर की दूरी पर कटान रह गया है। अभी भी जब तेज हवा की झोंके आती है तो कुछ न कुछ कटान होता है। अगर बीएसटी बंधा नदी में विलीन हो गया तो शोभा छपरा, लक्ष्मणछपरा, जयप्रकाश नगर, करन छपरा, रामपुर कोड़रहा आदि गांवों की तीन लाख की आबादी भी घाघरा की जद में आ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें