उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में शुक्रवार को ट्यूबवेल कालोनी से जुलूस निकाला। नगर भ्रमण के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में हुंकार भरी। कहा कि 35 हजार से कम वेतन मंजूर नहीं करेंगे। सभी कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने प्रदेश और केंद्र सरकार पर गलत नीतियां लाने का आरोप लगाया। कहा कि आज श्रमिक, कामगार न घर के हैं और न ही घाट के। कंपनियां मजूदरी के नाम पर उनका खूून चूस रही हैं। यहां तक कि उनसे आवाज उठाने तक की आजादी भी छीन ली गई।
जिले के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के कर्मचारियों ने नलकूप खंड द्वितीय के कार्यालय से रैली निकालकर लोक निर्माण कार्यालय होते हुए जिलाधिकारी आवास, विकास भवन होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मुख्य राजस्व अधिकारी बीराम को सौंपा। महासंघ के जिलाध्यक्ष अजय कुमार यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें कर्मचारी विरोधी हैं।
इन सरकारों ने अपने कार्यकाल में कर्मचारियों का नुकसान ही किया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को सरकारें आननफानन में लागू करना चाह रही हैं। उप्र मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन आफ सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष दयाशंकर ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में कार्यरत संविदाकर्मी, रसोइया, आंगनबाड़ी, आशा बहू, पीआरडी जवानों को स्थायी कर्मचारी घोषित किया जाए। इन कर्मचारियों को भी न्यूनतम 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिलाने की घोषणा की जाए।
कहा कि सरकारी कर्मचारियों के साथ संविदा कर्मियों का शोषण हमेशा से ही होता रहा है। राज्य कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी महासंघ के अध्यक्ष प्रताप नारायण उपाध्याय ने कहा कि सचिवालय कर्मियों की भांति प्रदेश के समस्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को न्यूनतम 1900 ग्रेड पे दिलवाना उनकी प्रतिबद्धता है। कहा कि आउट सोर्सिंग से होने वाली भर्तियों को रोकते हुए चतुर्थ श्रेणी के पदों पर रेगुलर भर्ती की जाए।
शिक्षणेतर संघ के प्रांतीय अध्यक्ष मुजतबा हुसैन ने कहा कि इस संवर्गों में शिक्षणेतर संघ तथा शिक्षक संघ भी साथ हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफ ारिशों का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। इस मौके पर बृजबिहारी सिंह, सुनील कुमार, सुशील कुमार पांडेय, राजेश कुमार रावत, संत सिंह, संतोष तिवारी, शशिकांत सिंह, नागेंद्र श्रीवास्तव, ददन भारती, जयप्रकाश वर्मा, डीएन यादव, चौधरी आनंद, कमलेश कुमार पांडेय, रामजी राय आदि लोग शामिल रहे। अध्यक्षता मुरलीधर सिंह तथा संचालन राजेश कुमार रावत ने किया।