बेल्थरारोड। चैत्र रामनवमी से शुरू होने वाला ऐतिहासिक सोनाडीह मेला कोरोना संक्रमण के चलते इस बार स्थगित कर दिया गया। मेले के संचालन के लिए प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के फलस्वरूप इलाकाई लोग एक बार फिर मेले का आनंद लेने से वंचित रह गए।
गौरतलब है कि वासंतिक नवरात्र के समापन पर चैत्र रामनवमी से सोनाडीह में प्रतिवर्ष विशाल मेले का आयोजन होता है। करीब 52 बीघा विस्तृत भू-भाग के मंदिर परिसर में लगने वाला मेला श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है। तीन जिलों की सीमा पर लगने वाले मेले में आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूरदराज से रोजाना हजारों श्रद्धालु नर- नारियों का जमावड़ा होता है। नवरात्र के प्रथम दिन से ही भागेश्वरी परमेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा नारियल, चुनरी, पुष्प, सिंदूर आदि सामग्रियों से पूजन अर्चन का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो नवमी तक चलता है। नवरात्र के समापन के बाद मेला शुरू हो जाता है, जो करीब एक पखवाड़े तक चलता है। मेले में विभिन्न वस्तुओं की सैकड़ों दुकानें सजाई जाती हैं। मनोरंजन के लिए सर्कस, झूला, जादू शो के साथ ही अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से देवी की आराधना से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मनोवांछित फल प्राप्त होता है। इसलिए दानत्व पर देवत्व की विजय का प्रतीक यह मेला श्रद्धालुओं की आस्था व विश्वास का केंद्र बना हुआ है। हालांकि इस साल कोरोना संक्रमण के चलते मेला स्थगित हो जाने से लोगों को काफी मायूसी हुई है। फिर भी लोगों का कहना है कि महामारी के इस दौर में मेला स्थगित होना जरूरी है। क्योंकि मेले में कोविड प्रोटोकाल का पालन होना असंभव है। मेले में उमड़े जनसैलाब से संक्रमण का खतरा बढ़ना लाजमी है।
इनसेट...
मन्नतें पूरी होने महिलाओं ने चढ़ाया दूध
बेल्थरारोड। वासंतिक नवरात्र की नवमी को देवी मंदिरों में दर्शन और पूजन अर्चन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सोनाडीह स्थित भागेश्वरी परमेश्वरी मंदिर, चंदाडीह स्थित मातुजी महारानी मंदिर, बीचला पोखरा स्थित दुर्गा- काली मंदिर समेत क्षेत्र के विभिन्न देवी मंदिरों में पूजन अर्चन की धूम रही। नवमी को श्रद्धालुओं ने देवी को हलवा, पूड़ी, चना, गुड़ आदि सामग्री चढ़ाकर विधिवत पूजन अर्चन किया। पूरे दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। देवी मां के जयकारे से वातावरण भक्तिमय बन गया। वहीं मंदिरों में महिलाओं ने मनोकामना पूर्ण होने पर कराह(मिट्टी के बर्तन में दूध) चढ़ाकर एवं भक्ति गीत गाकर परिवार की मंगलकामना की।
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