जयप्रकाशनगर। घाघरा नदी में उफान से लगातार हो रही कटान से बीएसटी बांध के तटवर्ती लोगों में दहशत है। बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के लिए कार्य किया जा रहा है जो घाघरा का वेग रोकने में नाकाफी साबित हो रहा है। बीते पांच दिनों से टी स्पर के हिस्से को घाघरा अपने आगोश में लेती जा रही है। रविवार को भी टी स्पर का कुछ हिस्सा घाघरा में समाहित हो गया। ऐसे में तटवर्ती लोग बाढ़ की आशंका से परेशान हैं।
सात वर्षों से विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) और चांददियर पंचायत बरसात के मौसम में घाघरा कहर से प्रभावित होता रहा है। घाघरा में करीब एक हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि समाहित हो चुकी है और अठगांवा पंचायत के तीन पूरवों के 350 परिवार बेघर हो चुके हैं। घाघरा अब बकुल्हा संसार टोला बांध को अपने आगोश में लेने को आतुर है जिसकी सुरक्षा के लिए बाढ़ खंड द्वारा अब तक करीब चालीस करोड़ रुपये खर्च किये गए हैं। जिसमें सठिया ढाला के समीप बकुल्हा संसार टोला बांध को सुरक्षित करने के लिए बीते वर्ष बाढ़ विभाग द्वारा एक टी स्पर का निर्माण कराया गया। जिसको नदी ने बीते वर्ष ही उसका कुछ भाग अपने आगोश में ले लिया था। पुन: उसकी मरम्मत विभाग द्वारा करवाया गया। बीते पांच दिनों से नदी ने अपना उग्र रूप दिखाना शुरू किया और टी स्पर के नदी वाले भाग में साढ़े 17 फुट चौड़ा बने एप्रन को अपने आगोश में ले लिया। सूचना पर बाढ़ विभाग तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित करने के लिए कटाव रोधी कार्य शुरू करवा दिया लेकिन नदी द्वारा अपने उग्र रूप में बदलाव न लाते हुए टी स्पर पर बने करीब 18 फुट चौड़े स्लोप के करीब 15 फुट चौड़े भाग को अपने आगोश में ले चुकी है। कटान अभी भी जारी है। हालांकि बाढ़ विभाग भी युद्ध स्तर पर कटाव रोधी कार्य करवाने में जुटा हुआ है लेकिन बकुल्हा संसार टोला बांध के समीप बसे नई बस्ती के लोगों की नींद हराम हो गयी है कि नदी कहीं हमें अपने आगोश में न ले ले।
कोट
घाघरा नदी ने टी स्पर के कुछ हिस्से को नुकसान जरूर पहुंचाया है लेकिन उससे कोई खतरा नहीं है। विभाग व ठेकेदारों द्वारा युद्धस्तर पर कटाव रोधी कार्य करवाकर उस स्थान को सुरक्षित कर दिया गया है और अब नदी भी शांत हो गई है।-रजनीकांत राय, जूनियर इंजीनियर, बाढ़ विभाग, बलिया