जिलों में कर्ज माफी योजना के तहत लघु और सीमांत किसानों की सूची बनाई गई और उनका सत्यापन भी किया गया। इसके बाद भी बहुत से किसानों का ऋण माफ नहीं हुआ है। 76 हजार 726 के सापेक्ष 49 हजार 980 किसानों के ही कर्ज माफ हो सके। हालांकि 20 हजार किसान अपात्र मिले जबकि छह हजार किसान आज भी लाभ के लिए भटक रहे हैं। कारण, जमा किए जाने वाले कागजातों में कहीं न कहीं कमी के चलते ऐसा हो रहा।
प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की दशा सुधारने के लिए ऋण मोचन योजना लागू की गई है। हालांकि इसकी प्रक्रिया शुरु करने में महीनों लग गए। लेकिन जब लागू हुर्ठ तो भी पात्रता के बावजूद सभी किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका। योजना के तहत कुल 76 हजार 726 किसानों का चयन किया गया था। इसके बाद सत्यापन शुरु हुआ।जिला कृषि अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया और सत्यापन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को दी गई। बैंकों की ओर से उपलब्ध कराए गए रिकार्ड के आधार पर राजस्व विभाग के अधिकारियों के सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर किसानों को इस योजना का लाभ दिया गया। जनपद में अलग-अलग चरणों में अब तक कुल 49 हजार 980 किसानों के कर्ज माफ किए जा चुके हैं।
नोडल अधिकारी की मानें तो सत्यापन के दौरान 20 हजार से अधिक किसानों के अपात्र मिलने के कारण उन्हें यह लाभ नहीं दिया गया। इसके अलावा करीब छह हजार किसानों के अभिलेखीय त्रुटि के चलते लाभ नहीं ले पाए। हालांकि किसानों को इस बाबत शिकायत दर्ज कराने के लिए सरकार की ओर से भरपूर मौका दिया गया। इसके लिए किसानों पहले किसान कर्ज राहत डॉट यूपीएसडीसी डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत 31 दिसंबर करने का प्रावधान किया गया था लेकिन शासन ने एक बार फिर इसकी तिथि बढ़ाकर 20 जनवरी तक कर दी थी। ऑनलाइन शिकायतों के आधार पर सत्यापन का कार्य राजस्व विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है।