बैरिया। गोपालनगर टाड़ी बस्ती में सरयू नदी की तेज धारा एक-एक कर मकानों पर प्रहार कर रही है। प्रलयकारी लहरों ने सोमवार की सुबह छह और लोगों के मकान अपने आगोश में समा लिया। भोर से ही लोगों का मकान तेज लहरों की धार के प्रहार से गिरने का सिलसिला जारी रहा। एक-एक मकान गिरते गए। मकान मालिक अपनी किस्मत पर आंसू बहाते रहे।
सोमवार को फूलना पुत्र घमेड़ी, रामनाथ पुत्र चन्द्रिका, देवनाथ पुत्र चन्द्रिका, बहारन पुत्र रामदेव, राजाराम पुत्र पशुराम व ललिता देवी पत्नी रामदेव का रिहायशी मकान भी कटान की भेंट चढ़ गया। ज्योहीं मकान नदी में गिरने का सिलसिला शुरू हुआ, बस्ती में दहशत का माहौल छा गया। चारों तरफ अफरातफरी मच गई। कटान में मकानों के विलीन होने के बाद कई परिवार बिखर गए हैं। जहां जिसे स्थान मिला, शरण ले लिया।
आलम यह है कि कई भाई पांच से सात किमी की दूरी पर अलग-अलग अपने परिवार के साथ आश्रय लिए हुए हैं। यहां कोई किसी को मरहम लगाने वाला नहीं है। खुद के आंसू खुद से पोछने पड़ रहे है। कटान पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी समस्या बूढ़े, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों की है। कैसे इन्हें तिरपाल या खर पतवार से भी खुले आसमान से बचाया जाए। इस बात को लेकर कटान पीड़ित चिंतित है। लेखपाल राजू यादव ने बताया कि सोमवार को छह लोगों का मकान नदी में विलीन हो गया। इसे राहत पोर्टल पर दर्ज किया गया है। राहत पोर्टल के माध्यम से कटान पीड़ितों के खाते में मुआवजा की धनराशि पहुंच जाएगी।
तिनका-तिनका जोड़ बनाया था आशियाना...अब कैसे होगा अपना घर
बैरिया। कटान पीड़ितों के आवास एक-एककर सरयू नदी में विलीन हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से राहत पोर्टल के माध्यम से उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन कटान पीड़ितों के मन में एक टीस है कि जिस आशियाने को तिनका-तिनका जो़ड़कर तैयार किया था, क्या उसे फिर से तैयार कर पाएंगे। अपनी बेबसी पर उनके सामने आंसू बहाने के सिवाय कोई चारा नहीं दिख रहा है। घर महिलाएं अपने मकान को सरयू नदीं में गिरते देख दहाड़े मार के रो रही है। पुरुषों की हालत यह है कि रिश्तेदारों आदि की मदद लेने को विवश हैं।