बैरिया। गंगा की उतरती लहरों का कटान तेजी से हो रहा है। सोमवार की दोपहर नौरंगा गांव में सात मकान कटान की भेंट चढ़ गए। पीड़ित सामान को भी नहीं बचा सके। कटिया बाबा यज्ञ स्थल कटान की जद में आते के बाद नौरंगा, भुआल छपरा व चक्की नौरंगा के लोगों में एक बार फिर भय व्याप्त हो गया।
नौरंगा निवासी महेन्द्र ठाकुर, हरी ठाकुर, नारायण ठाकुर, राजेन्द्र ठाकुर, रामजी ठाकुर, श्याम जी ठाकुर का मकान सोमवार की दोपहर लगभग एक बजे गंगा की गोद में समाहित हो गया। अब ये परिवार सड़क पर हैं। महेंद्र ठाकुर का कहना है कि उनका एक एकड़ कृषि योग्य भूमि बचा था जिसमें दिन-रात परिश्रम कर बच्चों का भरण पोषण कर रहे थे। अब वह भी गंगा ने छीन लिया। कटान से घिरे गांव नौरंगा, भुआल छपरा की हालात ये है कि दिन तो किसी तरह कट जा रहा है लेकिन रात रतजगा कर के ही गुजारनी पड़ रही है। स्थिति ये है कि दो जून की रोटी के लिए भी मासूम बिलबिलाते नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता का आलम ये है कि अब पिड़ितो के पार कोई भी राहत लेकर नहीं पहुंचा है। भोजन के नाम पर ये सत्तू, भूजा आदि खाकर दिन काट रहे हैं।
कटान पीड़ितों की परेशानियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां 25 दिन पहले तक लंगर की स्थिति थी, वहां अब फांका करना पड़ रहा है। विधायक जी का लंगर भी बंद हो गया है और जिला प्रशासन ने तो पहले ही यह कहते हुए भोजन के पैकेट बांटना बंद कर दिया था कि अब तो एक माह की राहत सामग्री दे दी गई है तो लोग अपना बनाएं खाएं। डीएम पहुंचे थे तो राहत की बात की थी, लेकिन इसके बाद भी कोई राहत नहीं मिल रही है।
भुआल छपरा निवासी रामाकांत ठाकुर ने कहा कि लगभग एक सप्ताह से बम्बूक्रेट विधि से कटान रोकने की कवायद शुरू की गई है। यह ऊंट के मुंह में जीरा है। इस प्रयास के बाद भी कटान रुक नहीं रहा है। नौरंगा निवासी विनोद ठाकुर का कहना है कि अब आखिर हम लोग जाएं तो कहां जाएं। पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर का कहना है कि कटिया बाबा यज्ञ स्थल गिरने के बाद मुसीबत खड़ी हो गई है।