बलिया। जोन परत के क्षय के कारण - ओजोन परत के क्षय का प्रमुख कारण मानव की भोगवादी प्रवृत्ति एवं विलासितापूर्ण जीवन है। भौतिक सुख- सुविधाओं की अधिक से अधिक प्राप्त करने की अंधी दौड़ में लिप्त आधुनिक मानव की करतूत ही ओजोन परत के क्षय का मूल कारण है। उक्त बातें पर्यावरणविद् और अमरनाथ मिश्र महाविद्यालय दूबे छपरा के पूर्व प्राचार्य डा. गणेश पाठक ने कहीं। उन्होंने कहा कि वायुमंडल में धरातल से लगभग 22 से 25 किमी की ऊँचाई 25 से 28 किमी की मोटाई में ओजोन गैस की एक परत पायी जाती है, जिसे ओजोन परत कहा जाता है। ओजोन गैस में सूर्य की पराबैगनी किरणों को अवशोषित करने की क्षमता होती है। यह सूर्य की घातक पराबैगनी किरणों को रोककर पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इसके क्षरण से जीव जंतुओं पर आनुवांशिक प्रभाव भी पड़ता है। इसके प्रभाव से मनुष्य की त्वचा झुलस जाती है और त्वचा कैंसर हो जाता है। मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त होने लगती है। साथ ही साँस संबंधी बीमारियों का भी जन्म होता है। बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधानों से पता चला है कि मिलों, कारखानों से निकलने वाले विषैले धुँओं एवं गैसों, प्रदूषण के बढ़ते स्तर, अंतरिक्ष अनुसंधान के तहत छोड़े जाने वाले राकेटों से भी ओजोन परत में तेजी से क्षरण हो रहा है।