बलिया। जिला अस्पताल में स्क्रब टाइफस की जांच निशुल्क मौजूद है। यह एक गंभीर बीमारी है, जो चूहों के काटने से होती है। पिछले माह इसकी चपेट में आधा दर्जन के करीब मरीज आए थे। सभी मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ्य है। जिले में अचानक स्क्रब टाइफस के मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य की परेशानी बढ़ी है।
विभाग ने जिला अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी या वार्ड में भर्ती मरीजों में इस बीमारी का लक्षण दिखाई देने पर रोग की पहचान के लिए तत्काल जांच कराने का निर्देश है। जनपद तीन तरफ से नदियों से घिरे होने के कारण संक्रमण बीमारियों का ज्यादा खतरा रहता है। कोविड संक्रमण के बाद अचानक स्क्रब टाइफस मरीज मिलने से विभाग सावधानी बरत रहा है। बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चला लोगों को जागरूक कर रहा है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. पंकज झा ने बताया कि स्क्रब टाइफस एक जीवाणुजनित संक्रमण है। संक्रमित मरीज की प्लेटलेट्स कम होने लगती है। मरीज को सांस की परेशानी, पीलिया, उल्टी, जी मिचलाना, जोड़ों में दर्द और तेज बुखार आता है। शरीर पर काले चकत्ते और फफोले भी पड़ जाते हैं। समय से रोग की पहचान होने पर कुछ दवाओं का प्रयोग करने से खतरा नहीं रहता है। इस तरह का लक्षण दिखे तो तत्काल विशेष डाक्टर को दिखाएं। लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
स्क्रब टाइफस से बचाव को बरते सावधानी
जिला सर्विलांस अधिकारी डा. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि स्क्रब टाइफस से घबराने की जरूरत नहीं। सावधानी बरत कर खतरे को टाल सकते हैं। खुले में टहलते वक्त पैरों में जूते पहनें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। घर के अंदर व आसपास के झाड़ी और खरपतवार को नष्ट कर साफ सुथरा रखे। तीन चार दिनों से अधिक बुखार रहने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं। खुद व बच्चों को सोते समय मच्छरदानी का अवश्य प्रयोग करें।