बलिया। सावन का महीना सोमवार से शुरू हो रहा है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते सामूहिक रूप से कोई कार्यक्रम नहीं होने और कांवर यात्रा पर रोक लगने के कारण सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालु देवाधिदेव का जलाभिषेक नहीं कर सकेेंगे। हालांकि शिवालयों को सजाया गया है। प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवर लेकर वाराणसी और बैजनाथ धाम जाते हैं और महादेव का जलाभिषेक करते हैं। इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जाती हैं। कांवर यात्रा के लिए बड़े पैमाने पर कांवर वाले कपड़े, कांवर समेत अन्य सामान की बिक्री होती है। इस बार कांवर यात्रा नहीं होने पर कांवर से जुड़े करीब 40 लाख के कारोबार प्रभावित होंगे। इसको लेकर व्यापारी चिंतित हैं।
सावन को लेकर कुछ माह पहले से ही अलग-अलग तरीके के व्यापारी सामानों को बाहर से मंगाने का काम करते हैं। हालांकि इस साल चार माह पहले से ही लागू लॉकडाउन व अभी भी पूर्णरुप से ट्रेनों आदि का संचालन नहीं होने के कारण कोई व्यापारी बाहर से सामान नहीं मंगा सका है। इसके अलावा लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिरों के कपाट भी पूरी तरह नहीं खुल रहे हैं। लिहाजा व्यापारियों ने भी सजगता बरती है और सामानों का स्टॉक नहीं किया है। सावन शुरू होते ही विभिन्न देवालयों पर हजारों की भीड़ उमड़ती थी और खासकर सोमवार को तो जलाभिषेक के लिए कई देवालयों पर लंबी कतार लगती थी। इसके अलावा श्रद्धालु भी गेरुआ वस्त्र धारण करके कांवर लेकर गंगा तटों से जल भर कर देवालयों में जलाभिषेक करते हैं। इन दिनों बलिया शहर व आसपास के 15 इलाकों में जिला प्रशासन की ओर से लॉकडान लागू किया गया है। लिहाजा जिले के ऐतिहासिक बाबा बालेश्वरनाथ मंदिर पर भी श्रद्धालु जलाभिषेक नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा जिले के सभी मंदिरों को बंद रखा गया है। हालांकि बाबा बालेश्वरनाथ मंदिर को पुजारी की ओर से सजाने का काम किया जा रहा है ताकि कोई श्रद्धालु दूर से ही दर्शन कर सकें।
उधर, व्यापारियों का कहना है कि सावन के एक माह में कुल 40 लाख के सामानों की बिक्री होती थी। इसमें गेरुआ वस्त्र व कांवर प्रमुख होता है। लेकिन इस साल तो अभी दुकान ही बंद है और आगे क्या होगा कहा नहीं जा सकता। कहा कि ऐसे भी इस साल बाहर से सामान नहीं लाया जा सका है। व्यापारी राजेश गुप्ता ने बताया कि महीनों पहले कोरोना संक्रमण के कारण व्यापारी बाहर से सामान नहीं जा पा रहे हैं। इस साल मंदिरों के बंद होने से श्रद्धालु भी सामान खरीदने से परहेज कर रहे हैं। कहा कि हर साल दो लाख से अधिक लोग गेरुआ वस्त्र की खरीदारी करते थे जो इस बार नहीं हो सकेगा। व्यापारी महावीर गुप्त ने कहा कि गेरुआ वस्त्र व कांवर को हर साल लाखों का कारोबार होता था जो इस बार नहीं हो सकेगा। इसको देखते हुए सामानों का स्टॉक भी छोटा रखा गया है। व्यापारी बबलू माली ने कहा कि हर साल की तरह इस संकट को देखते हुए कोई खास तैयारी नहीं की गई है। हर साल तो फूल, माला, कांवर आदि से डेढ़ से दो लाख रुपये तक कमाई हो जाती थी। सत्यनारायण प्रसाद ने कहा कि इस साल शिव मंदिरों के बंद होने के कारण वस्त्र, कांवर आदि की बिक्री भी नहीं होगी। उधर, शहर में लॉकडाउन है लिहाजा दुकान भी नहीं खुल सकेगा।
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इन मंदिरों पर सावन में जलाभिषेक को उमड़ती है भीड़, रहेगा सन्नाटा
बलिया। जिले के प्रमुख शिव मंदिरों पर सावन में जलाभिषेक को भारी होती थी जो इस बार देखने को नहीं मिलेगी। नगर के बालेश्वर नाथ मंदिर, गोलारोड स्थित कैलाश धाम मंदिर, मिड्ढी स्थित शिव मंदिर व भृगु मंदिर पर भोर से ही लोग जलाभिषेक को पहुंचने लगते थे। इसके अलावा नगर से सटे देवकली गांव स्थित देवकलेश्वर मंदिर, नगरी स्थित नटकेश्वर मंदिर, मिड्ढा के बाजार व गोरथाना के पोखरा स्थित शिव मंदिर, निधरिया स्थित पंच मंदिर, हनुमानगंज स्थित कपलेश्वर मंदिर, दिउली स्थित बाबा बालखंडी नाथ, छित ौनी स्थित बाबा छितेश्वर नाथ, सहतवार कस्बा स्थित पंच मंदिर, असेगा स्थित शोकहरण नाथ, कारो स्थित कामेश्वर नाथ, कोटवा स्थित बाबा मुक्ति नाथ, रसड़ा स्थित श्रीनाथ व लखनेश्वर डीह, बड़सरी स्थित अवनी नाथ, भड़सर स्थित दुखहरण नाथ, ब्यासी स्थित हरिहर नाथ, नगवां स्थित नागेश्वर नाथ, इब्राहिमपट्टी स्थित अवभूतेश्वर नाथ, बांसडीह कस्बा स्थित भुटेश्वर व रघुवेश्वर नाथ, थम्हनपुरा स्थित बाबा धर्मेश्वर नाथ मंदिर पर भी भारी भीड़ होती थी।