बैरिया। सरयू नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट के बाद भी सुरेमनपुर दियरांचल के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कई गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं, जबकि घरों में पानी भरा होने से जनजीवन प्रभावित है।
शासन की ओर से राशन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद ईंधन की व्यवस्था नहीं होने से बाढ़ पीड़ितों के चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। ऐसे में लोग सरकारी स्तर से उपलब्ध कराए जा रहे लंच पैकेट के सहारे किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि वितरित किए जा रहे लंच पैकेट की मात्रा पर्याप्त नहीं है। सरयू के बाढ़ के पानी से शिवाल मठिया, गोपालनगर,गोपालनगर टांडी, वशिष्ठ नगर, देवपुर, धूपनाथ के डेरा और बैज के डेरा अब भी प्रभावित हैं। इसके अलावा टोला फतेराय, बकुल्हां, चांददियर और इब्राहिमाबाद नौबरार में भी बाढ़ का असर बरकरार है। उधर, गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने से भवन टोला, भवन टोला पूर्वी, रामपुर कोरहड़ा, सेमरिया, गड़ेरिया, जगदीश और बलवंत छपरा समेत आधा दर्जन गांवों में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है।
क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच मदद करने को हाथ बढ़ रहे हैं। निषाद पार्टी के नेता अजय शंकर पाण्डेय ने रविवार को कोलकला ग्राम सभा में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच अपने कार्यकर्ताओं तथा साथियों के साथ बाढ़ राहत समाग्री वितरण किया। कनक पाण्डेय ने बताया राहत सामग्रियों के पैकेट कुल हजार लोगों को वितरित किए गए। पैकेट में 5 किलो चावल, 5 किलो आटा, 2 किलो आलू के अलावा
सोयाबीन, सरसों तेल, मसाला शामिल रहा। पूर्व चितविसाव, रामपुर नंबरी, रेंगहा, सुवरहा में भी बाढ़ पीड़ित लोगों के बीच बाढ़ राहत समाग्री वितरण किए गए। जिला पंचायत सदस्य विनय मिश्र, शिवनारायण साहनी, देवेंद्र निषाद, उमेश निषाद, हरिकृष्ण पासवान, सत्यदेव साहनी, राघवेंद्र यादव, गोविन्द उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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सरयू के जलस्तर में एक सेमी प्रतिघंटा घटाव
बेल्थरारोड। सरयू नदी के जलस्तर में घटाव हो रहा है। लगातार कई दिनों तक जलस्तर में वृद्धि के बाद घटाव का क्रम शुरू हो गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार की शाम जलस्तर 64.59 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान से 58 सेंटीमीटर अधिक है। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घटने का पूर्वानुमान किया है। जलस्तर घटने के बाद बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है, लेकिन नदी की प्रकृति में अप्रत्याशित परिवर्तन को लेकर तटवर्ती लोग सशंकित हैं।