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Ballia News: बार-बार रेत रोक रहा रास्ता, तीस घंटे बाद रवाना हुआ जलयान

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कोलकाता से अयोध्या के लिए निकला कैटामारन इलेक्ट्रिक जलयान दूसरे दिन बृहस्पतिवार को काफी मशक्कत के बाद तिलापुर से निकला लेकिन फिर रेवती क्षेत्र के वशिष्ठ नगर मौजा के लाल फक्कड़ बाबा की मठिया के सामने फंस गया। जलस्तर की कमी के साथ रेत की अधिकता जलयान के मार्ग में बाधक बनी है। जलपोत के साथ चल रहे कर्मचारियों की सूचना पर पटना से शीप डायरेक्टर लक्ष्मीकांत के नेतृत्व में पहुंची 40 सदस्यीय टीम भी पूरे दिन कार्य में जुटी रही। हालांकि 30 घंटे बाद जलयान वशिष्ठ नगर से रवाना हो गया था और दतहां तक की दूरी तय कर ली थी। जलयान का रास्ता सुगम बनाने के लिए दो ड्रेनेज मशीन भी लगाई गईं। समय बीतने से साथ ही निर्धारित तिथि तक जलपोत के अयोध्या पहुंचने को लेकर भी संशय बना हुआ था। हालांकि विभागीय लोगों का कहना था कि समय बचाने के लिए रात में भी दूरी तय करेंगे। बस कोहरा रास्ता न रोके।
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जलपोत से असिस्टेंट डायरेक्टर आनंद कुमार ने बताया कि जलयान के साथ चल रहे तकनीशियन सभी संसाधनों से लैस हैं। स्थानीय स्तर पर टीम का सहयोग किया जा रहा है। नवंबर के बाद सरयू का जलस्तर तेजी से गिरता है। इस समय नदी का जलस्तर आवश्यकता से कम है। यही नहीं नदी का मार्ग परिवर्तन भी इसमें सबसे बड़ा रोड़ा है। अन्य नदियों की तुलना में सरयू नदी की मार्ग परिवर्तनशीलता ज्यादे होती है। इसी वजह से गंगा नदी में (जेपी नगर तक) जलपोत को ऐसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा था, लेकिन सरयू में प्रवेश करते ही उथलापन, शिल्ट और परिवर्तित प्रवाह संचालन में अवरोधक बन रहा है।
दिक्कत भरा है तुर्तीपार तक का सफर
बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र के तुर्तीपार पुल तक पहुंचना काफी कठिन है। तुर्तीपार के बार सरयू नदी का ढलान काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह से हल्दीरामपुर से लेकर वशिष्ठ नगर तक पानी का स्तर अन्य क्षेत्र से कम मिलता है। इस बार सरयू नदी के इस परिक्षेत्र में बालू भी काफी मात्रा में जमा है। ऐसे में दतहां, चांदपुर में भी रेत के ढेर मार्ग में बाधक बन सकते हैं। यही नहीं मनियर क्षेत्र के एलास गढ़, नौकगांव, ककरघट्टा में भी नदी में बालू की मात्रा काफी अधिक है। सिकंदरपुर क्षेत्र के खरीद, कठौड़ा और डुहा विहरा के सामने भी नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है। ऐसी स्थिति में जब तक तुर्ती पार पुल को पार नही किया जाता तब तक समस्या मुंह बाए खड़ी रहेगी।
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बदले प्रवाह क्षेत्र ने बढ़ाई मुश्किलें
भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने जेपी नगर से अयोध्या तक बकायदे सर्वे कराने के बाद इस रूट को अंतिम रूप दिया था। बावजूद जलपोत के सुचारू संचालन में पग पग पर मुश्किल खड़ी हो रही है। एक अधिकारी ने बताया कि इस मार्ग का सर्वे भी पटना की टीम ने किया था। उस समय सिंचाई विभाग से कोई सलाह नहीं ली गई थी। यदि सर्वे के समय स्थानीय स्तर पर सलाह ली गई होती तो जेपी नगर से तुर्तीपार तक नदी की वास्तविकता से विभाग को अवगत करा दिया गया होता। प्रवाह क्षेत्र बदलने की वजह से ही दिक्कत आ रही है। जलपोत से असिस्टेंट डायरेक्टर आनंद कुमार ने बताया कि अगर कोहरा नहीं मिला तो रात को भी सफर करेंगे। क्योंकि पहले ही लेट हो चुके हैं। समय पर अयोध्या पहुंचना है। कोहरा मिलने पर ही लंगर डाला जाएगा।
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