गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। तेज गर्मी और बढ़ते तापमान से गर्भवती महिलाओं की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। गर्मी के कारण समय से पूर्व प्रसव और मृत बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ गया है। अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। रात में भी राहत नहीं मिल रही है।
तेज धूप व पछुआ गर्म हवा लू से आदमी से लेकर जानवर तक परेशान हैं। सरकारी से लेकर निजी अस्पताल में बेड मरीजों से फुल हो गए हैं। जिला महिला अस्पताल में ओपीडी में प्रतिदिन 450 से 500 के करीब महिलाएं इलाज कराने पहुंचती हैं।
गर्मी बढ़ने के बाद महिलाओं में उल्टी दस्त, पेट में दर्द, गर्मी से सिर दर्द, चक्कर, मितली और भूख की कमी आदि तरह-तरह की परेशानी हो रही है। महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ ने गर्भवती महिलाओं को अधिक गर्मी और डिहाईड्रेशन से गर्भ में मौजूद शिशु का वजन कम होने, समय से पहले जन्म और मृत जन्म का खतरा होने का अंदेशा जताया।
कहा कि तापमान सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी असर डालता है। गर्मी में सावधानी न बरतने पर गर्भकालीन मधुमेह और उच्च रक्तचाप की शिकायत बढ़ जाती है। तेज धूप व लू में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर न निकलने और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहने का सुझाव दिया।
परेशानी होने पर ओआरएस का घोल ज्यादा से ज्यादा पीने व चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी। सीएमएस डाॅ. सुमिता सिन्हा ने कहा कि गर्मी को देखते हुए ओपीडी के बाहर ओआरएस काउंटर लगाया गया है। 10 बेड का कोल्ड रूम है। सभी वार्डों व ओपीडी में एसी लगाया गया है। आने वाले सभी मरीजों को ओआरएस पाउडर का वितरण किया जा रहा है।