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राजस्व न्यायालयों में सालों तक नहीं हो पाता मुकदमों का निस्तारण

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बलिया। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद तहसील न्यायालयों में मुकदमों का निस्तारण सालों तक नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं कई मामले तो एक ही स्थिति में सालों से पड़े हैं और कई बार की तारीख भी कम्प्यूटर पर एक ही बार दर्ज कर दी जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से राजस्व न्यायालयों को पुराने मामले को वरीयता के आधार पर निस्तारण करने का निर्देश कई बार दिया गया लेकिन आज भी स्थिति ज्यों की त्यों है। जिले के राजस्व न्यायालयों में 30 हजार से अधिक मुकदमों का बोझ है। इसके अलावा औसत हर महीने करीब 100 मुकदमे राजस्व न्यायालयों दाखिल होता है। इसके अलावा तहसीलों में कभी अधिकारियों के कोर्ट में नहीं बैठने तो कभी हड़ताल या अन्य कारणों से न्यायालय का संचालन नहीं हो पाता है। लेकिन कोर्ट में भी अधिकारियों की ओर से पुराने मामलों को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई जाती है लिहाजा एक ही स्थिति में मुकदमे सालों तक पड़े रहते हैँ। आज भी कई राजस्व न्यायालयों में 15 साल से अधिक समय के मुकदमे लंबित हैँ और एक ही स्थिति में सालों से पड़े हैं। बतौर उदाहरण सोहांव गांव के रामेश्वर बनाम अशोक कुमार का मुकदमा सदर तहसील में लंबित है। हैरानी की बात है कि इस मुकदमे में एक पक्ष की ओर 18 जनवरी 2005 को एडीजे का आदेश भी संलग्न किया गया है जिसमें एक माह के अंदर दोनों पक्षों से साक्ष्य लेकर निस्तारित करने को कहा गया है। लेकिन 15 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह मुकदमा सालों से साक्ष्य वादी के स्तर पर लंबित है। इस मुकदमे में छह सालों में ही फरवरी 14 से जून 20 तक कुल 96 तारीखें पड़ी हैं। कंप्यूटर पर अगली तारीख 31 अक्तूबर को है साथ इसके बाद की तारीख 27 दिसंबर व 30 जनवरी 2021 भी निर्धारित कर दी गई है। इससे साफ है कि मुकदमों के निस्तारण को लेकर राजस्व विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
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