बलिया। पुणे में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित पांचवे विश्व विज्ञान,धर्म एवं दर्शन संसद में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी मुख्य वक़्ता रहे। उन्होंने कहा की धर्म से विरक्ति होती है, विरक्ति से योग होता है, योग से ज्ञान होता है और ज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्म हमें न्याय और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाता है। हम जब तक धर्म के साए में रहेंगे तब तक कभी भी ग़लत काम नहीं कर सकते हैं। रामायण और महाभारत दोनो ग्रंथ हमें धर्म की प्रेरणा देते हैं।
भारत सर्व धर्म समभाव के भाव को मानने वाला देश है। संस्कृति हमें पशु-पक्षियों से भी सौहार्द के साथ रहने की शिक्षा देती है। परंतु कुछ वर्षों से कुछ लोग देश के सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं जो ग़लत है। जो व्यक्ति जिस धर्म का पालन करता है उसे अच्छे से करना चाहिए। भारत के अंदर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी धर्म के अनुयायी रहते हैं। उन्होंने भोजपुरी में सुंदर सुभूमि भैया भारत के देशवा गीत गाकर बताया की वे पूर्वांचल से आए हैं। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. विश्वनाथ कराड ने स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी को सम्मानित किया।