स्वयंसवियों को परिचय पत्र देते एनडीआरएफ के अधिकारी।
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ेजिलाधिकारी की पहल पर एसपी के सहयोग से एनडीआरएफ की टीम ने उजियार घाट में कैम्प लगाकर आपदा से निपटने के लिए राहत के दौरान आने वाली चुनौतियों को बताया । साथ ही उससे निपटने के गुर भी सिखाए। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे कमिश्नर के. रविंद्रनायक ने जिला प्रशासन की इस पहल को काफी सराहा । साथ मे आए डीआईजी उदयशंकर जायसवाल ने इसे जनसेवा बताते हुए इसमे सहयोग करने वाले स्वयं सेवको को मानव सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहने का आह्वान किया।
इस मौके पर 250 बिना पंजीकरण की नाव का जिला पंचायत द्वारा चिह्नीकरण कर उनके नाविकों को पहचान पत्र सौंपा गया। इसके व्यौरे का स्थाई रजिस्ट्रीकरण कर अब इनकी मजदूरी व नाव का किराया सीधे इसके खाते में भेजा जाएगा । आपदा से निपटने के लिए प्रशासन इस कदर संवेदनशील है कि खराब पड़ी बड़ी नावों को भी ठीक कराने का निश्चय किया है। हम मछुवारों की समिति बनाकर सरकार की तरफ से उनकी मदद करेंगे।
आपदा कार्य मे लगने वाले सभी होमगार्ड, पीआरडी के जवानों तथा गोताखोरों का काफी कम प्रीमियम पर बीमा कराया जाएगा, ताकि किसी अनहोनी में उन्हें आर्थिक सम्बल मिल सके।
जिलाधिकारी ने इस बात का जोर देकर बताया कि आपदा के समय मे बाहरी टीमों से ज्यादा स्थानीय लोग कारगर साबित होते है।
इसलिए स्थानीय स्तर पर इन कार्य मे आपदा मित्र स्वयं सेवक के रूप में चिन्हित कर एक साल का प्रशिक्षण देने का निश्चय किया है। इस दौरान सीडीओ सन्तोष कुमार, एडीएम मनोज सिंघल, एसडीएम निखिल टीकाराम फुंडे, तहसीलदार जितेंद्र सिंह, एसडीआरएफ टीम के लीडर नागेंद्र सिंह मौजूद थे ।