भृगु की तपोभूमि पर लगने वाले ऐतिहासिक ददरी मेला के मीना बाजार में दूकानें सज गई है। ग्रामीण इलाकों से मेलार्थी भी आने शुरू हो गए है। दूकानें सजने के साथ मीना बाजार की खरीद-फरोख्त शुरू हो गई है। हालांकि मेले में पानी की कमी के चलते दूकानदारों को काफी फजीहत का सामना उठाना पड़ रहा है। जबकि मेला प्रशासन का दावा है कि मेले में सभी व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है।
महर्षि भृगु के शिष्य दर्दन मुनि के नाम पर लगने वाले ददरी मेले पर दिनों दिन ग्रहण लगता जा रहा है। जहां एक तरफ मेले के बिगड़ते स्वरुप को लेकर गैर प्रांतों एवं जिलों से आए दूकानदार चिंतित है। वहीं बहुत सी व्यववस्थाएं अब तक नहीं की गई है। मेले में दूकानदारों को पीने, नहाने और खाना बनाने के लिए हैंडपंप की कोई खास व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। वहीं मेले में उड़ रहे धूल को शांत करनेे करने के लिए पानी का छिड़काव भी समय से नहीं होना दूकानदारों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
आलम यह है कि बुलंदशहर, कानपूर, दिल्ली, छपरा, गाजियाबाद, मुरादाबाद से आए दूकानदार अपनी बेबसी किससे कहें। उनका मानना है कि मेले की व्यवस्था हर अच्छी होनी चाहिए। लेकिन मेले की व्यवस्था में विकास की जगह विनाश हो रहा है। जिससे मेले में कम ग्राहक आ रहे है।
मुरादाबाद से आए दूकानदार सब्बीर ने बताया कि अब तक दूकानों को लेकर आने वाले दूकानदार मेले में भीड़ और व्यवस्था को देखकर खुश रहते थे। लेकिन इस बार पीने के लिए पानी को भी तरसना पड़ रहा है। वहीं क्राकरी की दूकान लेकर आए खुर्शीद ने बताया कि अब दिनों दिन मेले का स्वरुप बिगड़ता जा रहा है। जिसके लिए जिला प्रशासन एवं मेला प्रशासन खुद जिम्मेदार है। मेला इलाके में अधिकांश स्थान पर मकानें बन गई है। जिससे मेला को काफी नुकसान हो रहा है।