संत शिरोमणि रविदास महाराज की 639वीं जयंती पर सोमवार को नगर स्थित संत रविदास मंदिर प्रबंधक समिति सतनी सराय के तत्वावधान में रविदास मंदिर से भव्य जुलूस निकाला गया।
जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करते हुए सतनीसराय स्थित रविदास मंदिर पहुंचा, जहां जुलूस में संत रविदास की झांकी के साथ ही गाजे-बाजे भी शमिल रहे।
इस दौरान मंदिर परिसर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए स्वामी सवेशानंद ने कहा कि 639 वर्ष पूर्व पैदा हुए संत रविदास ने समाज में फैले अंधविश्वासों तथा कुरीतियों पर चोट करते हुए जिस तरह से समाज को नई दिशा दिया, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी।
जब छूआ-छूत और अंधविश्वास अपने चरम पर था, उस समय संत रविदास ने अपना लोहा मनवाया, जो उनकी प्रतिभा को उजागर करता है। यदि रविदास जी महाराज दलित परिवार में पैदा न होकर किसी उच्च परिवार में पैदा हुए होते तो धर्म के ठेकेदार उन्हें भगवान बनाकर पूजना शुरू कर देते।
कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि रविदास के जीते-जी और मरणोपरांत जो सम्मान मिलना चाहिए, वह आज तक नहीं मिला। कहा कि आज संत रविदास के जन्मदिन पर कुछ लोग मत्था इसलिए टेक रहे हैं कि पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं और सबको दलित वोटों की जरूरत है।
संत रविदास जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर संजय उपाध्याय, अनिल राय, लाल साहब विश्वकर्मा, मदन वर्मा, शामू ठाकुर, रश्मिी, रामदेव, बब्लू गोंड, चंद्रकेतु गौतम, अवधेश राम, अभिमन्यु गोंड, महंथ राम आदि उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम के आयोजक एवं संत शिरोमणि रविदास मंदिर के प्रबंध समिति के प्रबंधक मिठाईलाल भारती ने कार्यक्रम में शिरकत करने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया।