नगर रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगर के रामलीला मैदान प्रांगण में बुधवार की रात आयोजित रामलीला के दूसरे दिन दरभंगा के कलाकारों ने रावण जन्म और देवताओं का क्षीर सागर में जाने का भावपूर्ण मंचन किया गया। इसे देखकर हजारों दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
मंचन के दौरान ओजस्वी और तेजस्वी ऋषि विशेश्वरा वन में तप कर रहे थे, जहां मयदानव की पुत्री केकसी उनके आश्रम में पहुंची और शादी करने की बात कही। जिसे ऋषि ने इंकार करते हुए कहा कि तुम दानव कुल से हो और मैं ऋषि। यह नहीं हो सकता।
लेकिन मयदानव के पुत्री के आग्रह और निवेदन पर ऋषि शादी के लिए राजी हुए और दोनों ने विवाह किया। इसके बाद धरती पर ओजस्वी और शक्तिशाली बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम रावण रखा गया। उधर रावण के जन्म की खबर सुनते ही देवता तत्काल क्षीर सागर पहुंचे, जहां तीनों लोक के स्वामी विष्णु से पूरी बात बताई।
इसके बाद भगवान विष्णु ने पृथ्वीलोक पर आयोध्या के राजा दशरथ के यहां पैदा होने का देवताओं को भरोसा दिलाया। इसके बाद देवता वापस हुए। इस भावपूर्ण मंचन को देख उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष विनोद सरावगी, कनिष्ठ अध्यक्ष दीपक केशरी, मानिक चंद्र, जितेंद्र, डा. गणेश प्रसाद आदि मौजूद रहे।