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मुगल काल के बाद पहली बार धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षाबंधन

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बलिया। मुगल काल के बाद पहली बार रक्षाबंधन पर ग्रह नक्षत्रों का ऐसा संयोग बन रहा है, जब भाई-बहनों ने लिए समृद्धि की बरसात होगी। ज्योतिषीय गणना के हिसाब से रविवार को रक्षाबंधन पर सिंह राशि में सूर्य, मंगल और बुध ग्रह एक साथ विराजमान होंगे। सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं। इस राशि में मित्र मंगल भी उनके साथ रहेंगे। जबकि शुक्र कन्या राशि में होगा। ग्रहों का ऐसा शुभ और फलदायी दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 11 अगस्त 1547 को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी थी। जब धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षाबंधन मनाया गया था।
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ज्योतिषाचार्य पं. अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि 22 अगस्त को सुबह 10:34 बजे तक शोभन योग रहेगा। रात 7:40 बजे तक धनिष्ठा योग रहेगा। पूर्णिमा तिथि 22 अगस्त को शाम 5:31 बजे तक रहेगी। रक्षाबंधन पर इस बार राखी बांधने के लिए 12 घंटे की लंबी शुभ अवधि रहेगी। सुबह 5:50 बजे से शाम 6:03 बजे तक किसी भी वक्त राखी बांध सकते हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक रक्षाबंधन का त्योहार राजयोग में आएगा। राखी पर इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसके कारण बहनें पूरे दिन भाई को राखी बांध सकेंगी। इस दौरान कुंभ राशि में गुरु की चाल वक्री रहेगी और इसके साथ चंद्रमा भी वहां मौजूद रहेगा। गुरु और चंद्रमा की इस युति से रक्षाबंधन पर गजकेशरी योग बन रहा है। इस योग से इंसान की महत्वाकांक्षाएं पूरी होती हैं।
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