दी सिविल बार एसोसिएशन के सभागार में अधिवक्ता दिवस एवं प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की 125वीं जयंती सामारोह आयोजित की गई। वक्ताओं ने उनके द्वारा किए गए कानूनी सुधाराें सहित विभिन्न मुद्दों पर उद्गार व्यक्त किया। कहा कि देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने में डॉ. राजेंद्र बाबू की अहम भूमिका रही।
भारत के प्रथम राष्ट्रपति संविधान निर्मात्री समिति के सदस्य एवं प्रख्यात कानूनविद डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 125वीं जयंती समारोह का आयोजन सिविल बार एसोसिएशन के सभागार में किया गया। सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश रंजन सिंह ने कहा कि राजेंद्र बाबू के पास बौद्धिक ज्ञान इस तरह का था कि जिस विषय पर वे एक बार अध्ययन कर लेते वह उनके दिमाग में पूरी तरह फिट हो जाता था। पूर्व अध्यक्ष अशोक ओझा ने कहा कि राजेंद्र बाबू पूर्ण रूप से हिंदू, हिंदी, हिंदुस्तान की परिकल्पना के समावेशी थे। वे कुशल अधिवक्ता भी थे। उन्हीं के याद में हम उनकी जयंती को अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाते हैं।
राष्ट्रपति भवन में हिंदी को अपनी भाषा के रूप में स्थापित किया था। अरविंद राय ने कहा कि सम्मान वही पाता है जो उसके लिए योग्य होता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद उसके वास्तविक हकदार हैं। सादगी व विचार का स्वरूप उनके जैसा व्यक्तित्व वाले लोगों को मिलता है। पूर्व सचिव शैलेश सिंह ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के विद्वता का कोई दूसरा विकल्प विश्व में नहीं रहा। पूर्व सचिव रामबदन यादव ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अधिवक्ता समाज का सजग प्रहरी बताया। कमलेश कुमार वर्मा ने राजेंद्र प्रसाद को अधिवक्ता समाज का सजग प्रहरी बताया। कहा कि राजेंद्र बाबू का जन्म छपरा में हुआ था। जबकि उनके पूर्वज बलिया में भी काफी दिन तक रहे। अधिवक्ता विनय कुमार सिंह, सच्चितानंद, रजनीकांत श्रीवास्तव, विजय शंकर राय, दिनेश तिवारी, इंद्रजीत, अजय कुमार राय, विजय शंकर राय, दिनेश तिवारी आदि ने भी विचार व्यक्त किया।