सोमवार को दिनभर मूसलाधार बारिश के बाद मंगलवार को भी रुक-रुक कर पानी बरसता रहा। इससे नगर सहित ग्रामीणांचलों में जगह-जगह जल जमाव हो गया।
कई सड़कों पर पानी लग जाने से राहगीरों को काफी फजीहतों का सामना करना पड़ा। उधर बारिश के बाद गंगा तथा घाघरा के जलस्तर में इजाफा होने के कारण तट वासी एक बार फिर से सहम गए हैं।
जिले में इस साल अब तक 61 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। जबकि सावन अभी 31 अगस्त तक है और इसी तरीके से बारिश होती रही तो कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि इस साल बाढ़ का आशंका प्रबल रहेगी।
कुछ भी हो तटवासियों के लिए यह समय दहशत का है। वहीं बारिश से सड़कें आदि टापू बन जाने के कारण आवागमन पर भी इसका प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है।
पानी के कारण समय से सरकारी तो सरकारी गैर सरकारी संस्थानों का काम भी प्रभावित हो रहा है। लोग समय से दफ्तर नहीं जा पा रहे हैं और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। कुल मिलाकर सावन का यह मौसम किसी के लिए सुकून भरा है तो किसी के लिए आफत है।