बलिया। जिला अस्पताल में शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई चिकित्सकीय सुविधा का लाभ मरीजों को समय से नहीं मिल पा रहा है। निशुल्क जांच की आस में आने वाले मरीजों को अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में पेट दर्द के संबधित पहुंचने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए एक या दो सप्ताह बाद का समय मिल रहा है। पेट दर्द से कराह रहे मरीजों को बाहर जांच कराना मजबूरी हो गई है।
जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सक पेट संबधित बीमारी होने पर रोज करीब 150 से 260 मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच लिखते हैं। उसमें सिर्फ तीन या चार इमरजेंसी मरीजों की जांच होती है। रेडियोलाजिस्ट अपनी बीमारी व मेडिकोलिगल एक्सरे रिपोर्ट बनाने का हवाला दे प्रतिदिन सिर्फ 15 से 20 मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच करते हैं। जांच के लिए मरीज को सात दिन पूर्व नंबर लगाना पड़ता है। मजबूर होकर मरीजों को अस्पताल से बाहर महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। इसके लिए उन्हें 700 से 800 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
सात सौ रुपये देकर बाहर कराई जांच
श्रीनगर निवासी आदित्य कुमार ने पेट दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल में सर्जन से दिखाया। उन्होंने अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी। गार्ड ने आठ दिन आगे का डेट दिया। मजबूरन बाहर सात सौ रुपया देकर जांच कराई।
छह दिन बाद का मिला है नंबर
धरहरा निवासी अनिता देवी को पेट दर्द की शिकायत पर डाक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी। उन्हें छह दिन आगे का नंबर मिला। पैसा के अभाव में वह बिना जांच कराए लौट गईं। कहा की छह दिन बाद आकर जांच कराउंगी।
सात दिन बाद कर रहे अल्ट्रासाउंड
हनुमानगंज की कुमावती देवी ने बताया कि जिला अस्पताल में कहने को निशुल्क इलाज व जांच की सुविधा मिल रही है। धरातल पर अल्ट्रासाउंड जांच सात दिन बाद हो रही है। मरीज प्राइवेट जांच केंद्रों पर जांच कराने को मजबूर है।
जांच के लिए सात दिन तड़पेगी बहन
अगरसंडा के अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि आयुष्मान कार्ड की जगह सरकारी अस्पतालों में सभी जांच व इलाज निशुल्क कर देती तो बेहतर रहता। सुबह से अस्पताल में बहन को दिखलाने आया था। अल्ट्रासाउंड जांच सात दिन बाद होगी तब तक क्या मरीज दर्द से तड़पता रहेगा।
रेडियोलाजिस्ट की तबीयत खराब होने के कारण समस्या हो रही है। शासन को समस्या से अवगत कराया गया है। एक अतिरिक्त रेडियोलाजिस्ट की मांग की गई है।- डॉ. सुजीत कुमार यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल।