जिला पंचायत चुनाव सदस्य पद के वार्ड नंबर 44 का मतदान निरस्त किए जाने से क्षुब्ध वार्ड के उम्मीदवारों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी खेमपाल सिंह से मिलकर राज्य चुनाव आयुक्त के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर हुए मतदान के आधार पर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करने की मांग की।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के दौरान जिला पंचायत के वार्ड नंबर 44 में सिंबल की गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद बीते 17 अक्तूबर को चुनाव आयोग ने मतदान को गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। आयोग के फैसले से क्षुब्ध वार्ड के उम्मीदवारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए 17 के चुनाव को वैध घोषित करने की मांग की।
जिला पंचायत के वार्ड नंबर 44 की उम्मीदवार सीमा सिंह पत्नी अजय सिंह ने आयोग को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया कि नामांकन के पश्चात हर प्रत्याशी को तीसरे चरण के लिए दस अक्तूबर को चुनाव चिह्न वितरित किया गया था। जिसमें आरओ खेमपाल सिंह ने उसे टेलीफोन चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
सिंबल मिलने के बाद चुनाव का प्रचार-प्रसार भी किया गया। 17 अक्तूबर को चुनाव होने के बाद गलत शिकायत के आधार पर आयोग द्वारा उसे निरस्त कर दिया गया। आयोग के इस फरमान से प्रत्याशियों को आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है। ऐसे चुनाव का निरस्तीकरण आदेश जरूरी है। इस मौके पर दिनेश प्रताप सिंह, मानवेंद्र विक्रम सिंह, किशन प्रताप सिंह, राकेश कुमार सिंह टिंकू, किशन प्रताप सिंह, अजय सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
चुनाव को मजाक बना दिया जिला प्रशासन: किशन
मतदान को निरस्त किए जाने के खिलाफ वार्ड नंबर 44 के विभिन्न उम्मीदवारों ने टीडी कालेज के पूर्व अध्यक्ष किशन प्रताप सिंह के नेतृत्व में सोमवार को जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। साथ ही चुनाव पूर्व आयोग से तयशुदा खर्च की मांग की। श्री सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि जिला प्रशासन ने इस त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को मजाक बनाकर रख दिया है।
उम्मीदवारों के चुनाव खर्च एवं समय की चिंता किसी को नहीं है। जिन आधारों पर चुनाव निरस्त किया गया है। वह बेबुनियाद है। चुनाव चिह्न का आवंटन 10 अक्टूबर को ही हो गया था। जिस पर सारे उम्मीदवारों का हस्ताक्षर है। ऐसे में पुन: चुनाव कराने के मद्देनजर प्रत्याशियों को अधिक खर्च बहन करना पड़ेगा। ऐसे में चुनाव रद्द को तभी स्वीकार्य माना जाएगा। जब जिला प्रशासन उसका भुगतान करेंगे। कहा कि चुनावोपरांत इस चुनाव में जिला प्रशासन की संदिग्ध भूमिका के खिलाफ आयोग से शिकायत की जाएगी। साथ ही आंदोलन छेड़ा जाएगा।