फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अगले वर्ष मिलने का वादा कर ददरी मेले ने ली िवदा

Wed, 16 Dec 2015 11:21 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐतिहासिक ददरी मेला अंतिम समय में पूरे शबाब पर रहा। बुधवार को मेले का समापन हुआ और भीड़ संडे जैसी रही। मेले में आई महिलाओं में खरीदारी को लेकर होड़ देखने को मिला।
विज्ञापन


बढ़ रहे ठंड और कोहरे के बाद लोगों ने मेले में ऊनी वस्त्र, शाल आदि की  खरीददारी की। मेले में कहीं ऊनी तो कहीं महिलाओं के सजावटी सामानों के लिए  भीड़ देखने लायक रही। हर कोई सस्ता और अच्छा खरीदने के लिए इधर-  उधर भागता  नजर आया। मेले में पैर रखने तक की जगह नहीं रही।

बुधवार की सुबह मौसम का मिजाज गड़बड़ होने के बाद भी मेलार्थियों की भीड़ में कोई कमी  देखने को नहीं मिली। अधिकांश दुकानों पर महिलाओं तथा बच्चों का जमावड़ा  देखने को मिला।
विज्ञापन


 पंचायत चुनाव बीतने के बाद मेले ने जोर पकड़ा । मेले में महिलाओं की टोली अधिकांश ऊनी  वस्त्रों के दूकानों पर अधिक दिख रही थी। चाहे  वह बच्चों के लिए हो या  बुजुर्गों के लिए।

 हर तरफ बस एक ही बात ठंडा में फिक्स रेट पर खरीद लो  चाची, दीदी...। मेला लगने के बाद हर साल गैर जनपदों से आए दूकानदार कम  बिक्री को लेकर थोड़ा मायूस तो दिखते हैं, लेकिन जैसे-जैसे मेला समाप्त  होने लगता है लोगों की भीड़ बढने लगती है।  
इस समय चार दिनों से ठंड पड़  रही है, लेकिन मेला का समय कम होने के कारण पूरे मीना बाजार  में लोगों को  मशक्कत करनी पड़ी। वहीं सुरक्षा को  लेकर मीना बाजार थाना  प्रभारी विवेक पांडेय चक्रमण करते रहे है।


सिर चढ़ बोला कविताओं का दिलकश जादू
मोहब्बत किसी पर जाया हम नहीं करते, हर किसी पर दिल लुटाया हम नहीं करते... कुछ ऐसी ही शानदार रचनाओं से ददरी मेले के भारतेंदु कलामंच को पूरी रात गुलजार रखा।

 मंगलवार की रात प्रसिद्ध अखिल भारतीय कवि सम्मेलन  का आयोजन किया गया था। जिसमें देश के कोने-कोने से आए कवि और कवित्रियों ने अपनी  रचनाओं को पढ़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ  मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक अनीस अहमद अंसारी ने फीता काटकर किया।

अखिल  भारतीय कवि सम्मेलन की शुरूआत दिल्ली से आई कवित्री डा. सविता शर्मा की  वाणी वंदना से हुई। उन्होंने सुनाया कि कल मिले ना मिले बदचलन हवाओं का रूख  छोड़ देंगे हम...।
 शृंगार रस में श्रोताओं को गोता लगवाते हुए पढा कि मोहब्बत किसी पर जाया हम नहीं करते, हर किसी पर दिल लूटाया हम नहीं करते.., ्प्रेम है क्या कभी पीड़ा कभी आनंद.. आदि सुनाकर वाहवाही लूटी।

 लखनऊ से आए सर्वेश अस्थाना ने कुशल संचालन के दौरान सुनाया कि  ्मुस्कराओ की हंसी लौट आए, कुछ किया जाए कि रेत में नमी लौट आए..। इसी क्रम  में विकास बौखल ने भी कई हास्य व्यंग्य रचानाएं सुनाकर लोगों को लोटपोट कर  दिया।

 युवा कवि प्रख्यात मिश्र ने देश पर अपने प्राणों की आहूति देने वालों  पर कई पक्तियां पढ़ी। कहा कि मंत्री से लेकर संत्री तक हर कोई अपने जेब  भरने के  चक्कर में है। लेकिन शहीदों को देने के लिए किसी के पास कुछ नहीं  होता।

 कवित्री डा. कविता किरण ने सुनाया कि तुम्हारे होकर भी हम तुम्हारे  हो नहीं पाए उधर तुम सो नहीं पाए इधर हम सो नहीं पाए, न तुझको ही मुहब्बत  थी न मुझको की मुहब्बत थी सभी मुहब्बत के नाम खिलावाड़ करते है मुहब्बत कौन  करजता है यह हम खूब समझते है।

सुनाया कि कली जब फूल बनती है तो भवरे डोल  जाते है मुहब्बत अपने हर किसी आशिक पर हम लुटाया नहीं करते। खुशी से  कैसे-कैसे मन में लड्डू फू ट जाते है कलाई में कंगन चटककर अक्सर टूट जाते  है।

 वाराणसी से आए अशोक अज्ञान ने लोगों को अपनी काव्य रचनाओं से खुब  गुदगुदाया। वहीं गजेंद्र प्रियांशु ने सुनाया कि हाथ छुडाकर कहां चल दिए  मुझे झाडू थमाकर कहा चल दिए।

तुम संवरती-संवरती हुई सैफई, हम उजड़कर मुज्जफ  रनगर रह गए। इस मौके पर कवि दीपक गुप्ता, कमलेश शर्मा, झगडू भैया, आशीष  अनल, राजकिशोर तिवारी, अशोक अज्ञान ने पूरी रात अपनी काव्य रचनाओं  से गुदगुदाया।

निःशक्तों ने लिया आनंद
बलिया।  बेसिक शिक्षा परिषद के तहत संचालित       मूक-बधिर विद्यालयों के बच्चों को भी  मेला में स्कूल       के शिक्षकों ने भ्रमण कराया। इस दौरान पूर्व नपा  अध्यक्ष  लक्ष्मण गुप्ता एवं सभासदों ने मूक बधिरों को जलेबी, खजला आदि खिलाकर मेले का लुत्फ  पूरा कराया।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें