बेल्थरारोड। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आद्याशंकर यादव ने सरकारी नौकरी की जगह पांच साल के संविदा पर नौकरी देने के सरकार के निर्णय की आलोचना की है। कहा कि सरकार के तुगलकी फरमान से युवाओं को झटका लगा है। उन्होंने कहा कि पांच साल तक संविदा पर नौकरी करने के बाद साक्षात्कार के आधार पर सरकारी नौकरी देने में बड़ा खेल हो सकता है। रविवार को रेलवे प्रांगण में पत्रकारों से वार्ता करते हुए यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार के नौकरी समाप्त कर संविदा पर रखने के निर्णय से युवाओं में निराशा है। उन्होंने कहा कि नौकरी चाहने वाले नौजवान की स्थिति फुटबॉल जैसी हो गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों में मंहगी शिक्षा और डिग्री लेकर जो नौजवान नौकरी के सपने बुन रहे थे, सरकार के फैसले ने उनकी आशाओं पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा गलत फैसला करके सरकार ने युवाओं की योग्यता का मखौल उड़ाया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के चलते युवाओं को अपनी डिग्री और योग्यता के बावजूद सरकार के रहमो करम पर आश्रित रहना होगा। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने जीवन की पूंजी बच्चों के भविष्य को संवारने में लगाता है, लेकिन योगी सरकार के इस फरमान से अभिभावकों में रोष की लहर है। अभिभावकों ने सरकार के इस फैसले को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।