बलिया । जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। जिले के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी घर बैठे वेतन उठा रहे हैं। हाल ही में मुरली छपरा पीएचसी का एक हाजिरी रजिस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें 16 में से 7 कर्मचारियों की एडवांस हाजिरी लगी मिली। इस घटना ने विभाग के बायोमेट्रिक उपस्थिति के दावों की हवा निकाल दी है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां चिकित्सकों के कुल 221 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 110 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी 25 डॉक्टर लंबे समय से गैर-हाजिरी चल रहे हैं और 7 पीजी की पढ़ाई करने गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी भयावह है। जहां डॉक्टरों के अभाव में लोग अप्रशिक्षित झोलाछाप से इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। पिछले 15 महीनों में अवैध अस्पतालों और अप्रशिक्षित हाथों से प्रसव के दौरान 13 गर्भवती महिलाओं और 4 नवजातों की मौत हो चुकी है।
शिकायत है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रभारियों की मिलीभगत से कर्मचारी गायब रहते हैं। सुखपुरा सीएचसी पर तैनात प्रभारी डॉ. सिद्धि रंजन सप्ताह में मात्र दो दिन दर्शन देते हैं। रसड़ा सीएचसी में तैनात दो डेंटल डॉक्टर और फार्मासिस्ट, बसंतपुर सीएचसी की महिला चिकित्सक समेत सोनबरसा, नगरा, सिकंदरपुर और नरही जैसे केंद्रों पर 25 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी गायब रहकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं।
जिले में चिकित्सकों की संख्या पद के सापेक्ष आधे से कम है। सभी केंद्रों पर बायोमेट्रिक मशीनें लगाई गई हैं और उसी आधार पर वेतन जारी होता है। कुछ चिकित्सक चाइल्ड केयर लीव पर हैं। गैर-हाजिर रहने की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर आनंद कुमार सिंह, प्रभारी सीएमओ, बलिया