जिला कारागार बलिया ऐसा है कि यहां बाढ़ और जलभराव से खौफ से बंदियों को दूसरे जिलों के जेलों में ट्रांसफर किया जाता है। यूं कह ले कि यहां के बंदियों का जिला बदर हो जाता है। बीते सालों में बाढ़ के दौरान जेल परिसर में जलभराव के समय बंदियों को दूसरे जेलों में शिफ्ट किया जाता रहा है।
इस बार शासन ने बाढ़ से पूर्व ही बंदियों को कटेगरी के हिसाब से जिला कारागार मऊ और आजमगढ़ स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। कुछ बंदी वाराणसी सेंट्रल भी भेजे जाएंगे।
इस वर्ष लगभग 550 बंदियों को जल्द ही दूसरी जेलों में भेजने की प्रकिया पूरी की जाएगी।
कुछ लोग शासन के निर्देश को जिला कारागार को स्थानांतरित करने से भी जोड़ कर देख रहे हैं। जिला कारागार के लिए नारायणपाली में पहले ही 90 एकड़ जमीन तलाश कर इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
जनपद में मेडिकल कॉलेज, जीआईसी और जिला कारागार का प्रस्ताव एक दूसरे से जुड़ा है। अब शासन की ओर से जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों को अन्य जेलों में स्थानांतरित करने का आदेश मिला है।
बिना जलभराव के बंदियों को स्थानांतरित करने का आदेश जारी होने से नई जेल के निर्माण की संभावनाओं को बल मिला है। हालांकि अधिकारी अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। आदेश के अनुसार जेल में निरुद्ध विचाराधीन 388 पुरुष और 21 महिला बंदियों को मऊ जिला कारागार भेजा जाएगा।
49 को जिला कारागार आजमगढ़ स्थानांतरित किया जाएगा। 20 ऐसे बंदी जिन पर अन्य केस विचाराधीन हैं, उन्हें भी जिला कारागार मऊ भेजा जाएगा। 16 ऐसे पुरुष बंदी जिन्हें सात वर्ष से कम की सजा सुनाई गई है उन्हें सेंट्रल जेल वाराणसी भेजा जाएगा।
शासन से बंदियों को स्थानांतरित करने का आदेश मिला है। आदेश के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। नई जेल के निर्माण के बारे राजस्व विभाग के अधिकारी ही बता पाएंगे। - राजेंद्र सिंह, जेलर