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निर्भया के गांव में होली मनाने की तैयारी शुरू

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नरही। निर्भया के दरिंदों की फांसी टलने के सभी रास्ते बंद होने की जानकारी होने के बाद निर्भया के गांव में होली मनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उधर, निर्भया के बाबा और चाचा ने रात भर जागने की घोषणा भी कर दी है, ताकि सुबह फांसी होने की सटीक जानकारी पा सके।
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निर्भया के गांव के समाजसेवी अश्वनी पांडेय ने बताया कि गांव में अबीर-गुलाल आदि खरीदने की शुरूआत हो गई है। लोगों ने मिठाई आदि का आर्डर देना भी शुरू कर दिया है, ताकि सुबह दरिंदों को फांसी चढ़ने के बाद गांव में धूमधाम से खुशियां मनाई जा सके। पांडेय ने कहा कि जिस घड़ी का हम लोगों को बेसब्री से इंतजार था, आखिर वह घड़ी अब करीब आ गई है। इस बार हमें पूरी उम्मीद है कि शुक्रवार की सुबह सभी दरिंदे फांसी पर लटका दिए जाएंगे। हमें जैसे ही इसकी सूचना मिलेगी, पूरा गांव एक साथ अबीर-गुलाल के साथ होली का जश्न मनाएगा। इससे देश के सामने यह संदेश भी जाएगा भी की दरिंदगी का परिणाम अंतत: फांसी ही होती है, आप उससे बचने का चाहे जितना प्रयास कर लें, बच नहीं सकते।
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जिसे बनाना था डॉक्टर, उसकी अर्थी उठानी पड़ी थी
नरही। दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार शिकार निर्भया का इलाज सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में चल रहा था। वह जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, तभी उसने अपनी मां से कहा था मां मैं अभी जीना चाहती हूं। उसकी मां को उसके ये अंतिम आज भी कचोटते हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने कहा था, बेटी तू जरूर जीएगी, तो उसने कहा था कि मां यदि मैं नहीं बची तो दरिदों को सजा जरूर दिलवाना, उन्हें उनके किए की सजा मिलनी ही चाहिए, यह कहते हुए मां आज भी रो पड़ती हैं। वह कहती हैं कि बेटी के इन अंतिम शब्दों को पूरा कराने के लिए ही उन्होंने पति के कंधे से कंधा मिलाकर निर्भया की न्याय की लड़ाई में उनका साथ दिया और आज अंतत: दरिंदों को फांसी पर लटकाने का समय सामने आ गया है। पिता यह कहते हुए फफक पड़ते हैं कि जिस बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना संजोया था, उसकी अर्थी को कंधा देना मेरी जिंदगी का सबसे दुखद पल था।
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