बलिया। सोहन सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी एक लाख का इनामी नक्सली राजकुमार वर्मा का 16 साल बाद भी सुराग लगाने में पुलिस सहित जांच एजेंसियां विफल रही हैं। अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। दो दिन पहले एनआईए टीम ने सुराग मिलने पर उसकी गिरफ्तारी के लिए जिले में दो ठिकानों पर छापा मारा लेकिन कोई कुछ हाथ नहीं लगा।
16 वर्ष पूर्व सोहन सिंह हत्याकांड के बाद से राजकुमार फरार है। उम्मीद जताई जा रही कि अब तक नक्सली संगठन में उसका पद कमांडर या उसके समकक्ष हो गया होगा। इसकी जानकारी एनआईए टीम कर रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम राशि बढ़ाने की योजना है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इनाम की राशि एक लाख से पांच लाख बढ़ाई जा सकती है। एक वर्ष पूर्व पांच हार्डकोर गिरफ्तार नक्सलियों से पूछताछ सहित अन्य जांच के बाद एनआईए जिस तरह से राजकुमार की गिरफ्तारी को लेकर सक्रिय दिख रही है, उससे अंदेशा जताया जा रह रहा है कि उसका जिला व नक्सल गतिविधियों से जुड़ाव है। घटना के संबंधित एक-एक पहलु की जांच टीम ने की है। टीम अभी जिले में कैंप कर अन्य नक्सली घटनाओं की जानकारी जुटाने में लगी है।
सोहन सिंह हत्याकांड के पूर्व बैठकर कर बांटे गए थे हथियार : सदर कोतवाली के सहरसपाली गांव में दो नवंबर 2008 की शाम को घर लौट रहे सोहन सिंह की गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बिहार के नक्सलियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों की माने तो घटना के बीस दिन पूर्व बिहार से आए कुछ नक्सलियों के नेतृत्व में गांव के उत्तर रेलवे लाइन से सटे एक स्थान पर मिटिंग हुई थी। हत्या की योजन बनाकर हथियार बांटे गए थे। हत्याकांड में शामिल कई आरोपियों ने बिहार में जाकर नक्सलियों से ट्रेनिंग भी ली थी। हत्या को अंजाम देने के बाद दहशत फैलाने के लिए आरोपियों ने लाल सलाम की नारेबाजी भी की थी। हत्या के बाद सोहन सिंह के खून से सना पर्चा उनके हाता में फेंका था। जब शहर से गांव तक पर्चे फेंके गए तब परिजनों ने खून वाला पर्चा पुलिस को दिया था। पर्चे के आधार पर पुलिस व जांच एजेंसियों ने जांच पड़ताल की। आरोपियों के घर से जमीन के अंदर से भारी मात्रा में हथियार, बम सहित अन्य सामग्री मिली थी। हत्याकांड में 18 लोगों का नाम आया था, जिसमें कई के परिजन गांव से पलायन कर चुके हैं। एसपी विक्रांतवीर ने कहा कि सहरसपाली में नक्सली गतिविधियाें की जांच एनआईए की टीम कर रही है। उसकी जानकारी टीम के अधिकारी ही दे सकते हैं। पूर्व के नक्सल प्रभावित गांवों में पुलिस लगातार सक्रिय है।