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प्रकृति हुई मेहरबां तो सरकार की पड़ी मार

Wed, 16 Nov 2016 08:09 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
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दो हजार रुपये का नोट
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जब से 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी लगी है, तब से चारों तरफ खलबली मच गई है। राजनेता हो या किसान, सभी परेशान हैं। लेकिन  किसानों के हालत तो आगे कुंआ पीछे खाई है। कारण कि क्षेत्र में जो धान क्रय केंद्र खोले गए हैं, उसमें धान की खरीदारी शुरू नहीं हुई। ऐसे में किसान से सोचकर सिर पर हाथ रखकर बैठे हैं कि जब फसल ही नहीं बेच पाएंगे तो बच्चों के शादी ब्याह और आगे की खेती कैसे होगी। 
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धान क्रय केंद्र के विपणन निरीक्षक शीतल प्रसाद सरोज का कहना है कि ऑनलाइन के माध्यम से धान खरीद बिक्री का रिकार्ड रखना है लेकिन इधर क्रय केंद्र का लैपटॉप नहीं मिल पा रहा है, जिससे खरीदारी प्रभावित है। ऐसे में किसान अपनी मेहनत की फसल बिचौलियों के हाथों औनै-पौने दामों में बेचने को विवश हैं और यहां भी उन्हें नोटबंदी की मार झेलनी पड़ रही है। 


गौरतलब हो कि बीते कई वर्षों से मार झेल रहे किसानों को इस साल प्रकृति ने राहत दी और धान की पैदावार उम्मीद के मुताबिक हुई। किसान सोच रहे थे कि इस बार की फसल से वे पिछले कई वर्षों के घाटे की भरपाई कर लेंगे। इसके क्रम में शासन ने फरमान जारी किया कि एक नवंबर से धान की खरीदारी क्रय केंद्रों पर शुरू हो जाएगी।
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लेकिन क्षेत्र के करम्मर गांव स्थित क्रय केंद्र पर अभी तक धान की खरीदारी शुरू नहीं हो पाई। तैनात कर्मचारी यह कहते फिरते हैं कि अभी धान की खरीद शुरू नहीं हुई है। रजिस्ट्रेशन करा लीजिए, धान की खरीद शुरू होते ही आपके मोबाइल पर मैसेज भेज दिया जाएगा। वहीं विपणन निरीक्षक का कहना है केंद्र में लैपटाप न होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है।

लैपटॉप मिलते ही खरीदारी शुरू कर दी जाएगी। इधर किसान यह सोचकर बैठे थे कि धान के पैसे से वह अगली खेती करेंगे तथा घर के मांगलिक कार्यक्रम को निबटाएंगे। ऐसे में धान की खरीद शुरू होने से किसान खासे चिंतित है।
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