जिलाधिकारी सुरेन्द्र विक्रम ने शौचालय निर्माण के 28.459 लाख के गबन मामले में बैरिया ब्लाक के दयाछपरा गांव की प्रधान लक्ष्मी के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दिया है। ग्राम प्रधान के कर्तव्य निर्वहन को डीएम ने तीन सदस्यीय समिति बनाने के लिए बैरिया के बीडीओ को गांव के ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है।
डीएम ने सचिव संजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीडीओ को आदेश देते हुए मामले की अंतिम जांच के लिए बीएसए व डीआरडीए के एई को नामित कर 15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा है। डेढ़ माह पहले प्रधान, सचिव समेत तीन लोगों के खिलाफ बैरिया थाने में गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
छह माह पहले जनवरी महीने में डीपीआरओ आरके यादव ने बैरिया ब्लाक के दयाछपरा गांव का औचक निरीक्षण कर शौचालयों के निर्माण को देखा। यहां वर्ष 2013-14 में स्वच्छता अभियान के तहत प्रति शौचालय 4600 के हिसाब से कुल 10.35 लाख भेजी गई लेकिन मौके पर 78 शौचालयों का निर्माण नहीं मिला।
वर्ष 2014-15 में नमामि गंगे योजना के तहत प्रति शौचालय 12 हजार के हिसाब से कुल 25.92 लाख की धनराशि भेजी गई लेकिन मौके पर केवल 16 शौचालय ही बने मिले।
जांच में मिली गड़बड़ी डीपीआरओ ने माना था कि बने कुल 163 शौचालय मानक के अनुरुप नहीं है।
निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ ने शौचालय की धनराशि से संबंधित खाते की भी पड़ताल की थी। इसमें सामने आया कि ग्राम सचिव की ओर से आठ बार में अपने नाम से कुल 8.12 लाख का आहरण चेक के माध्यम से किया गया है। यह भी सामने आया था 28.459 लाख की धनराशि आहरण करने के बावजूद शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया है।
मामला डीएम तक पहुंचा तब हुई कार्रवाई
डीपीआरओ ने सचिव संजय सिंह व प्रधान लक्ष्मी देवी से स्पष्टीकरण मांगा। महीनों तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। दो माह पहले ग्रामीणों की शिकायत पर जब डीएम गोविंद राजू एनएस ने डीपीआरओ को फटकार लगाई तो उन्होंने बैरिया ब्लाक के एडीओ पंचायत उमेश कुमार सिंह को मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया।
करीब एक पखवारा तक मामले एडीओ पंचायत भी दबाए रहे लेकिन मामला डीएम के यहां फिर पहुंचा तो एडीओ पंचायत ने दयाछपरा की प्रधान श्रीमती लक्ष्मी, पूर्व प्रधान सर्वजीत पासवान तथा सचिव संजय सिंह के खिलाफ बैरिया थाने में गबन का मुकदमा दर्ज कराया।