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पीएम आवास योजना भी मनमानी का शिकार

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बलिया। पीएम आवास योजना भी अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी का शिकार होकर रह गया है। पात्र जहां आवास के लिए भटक रहे हैं वहीं अपात्रों को आवास का आवंटन कर दिया जाता है। बताया जाता है कि इसके लिए ब्लॉक स्तर से तरह तरह के खेल किये जाते हैं। जिले में पूर्व के सालों में आवंटित 154 पीएम आवास अभी तक नहीं बन सके हैं। जांच में यह अपात्र मिले और इनसे रिकवरी में विभाग जुटा है। अब तक 84 लोगों से रिकवरी हो चुकी है और शेष लाभार्थियों से रिकवरी की कार्रवाई चल रही है। वर्ष 2015-16 में पूर्व से संचालित इंदिरा आवास योजना के स्थान पर केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया। इस योजना के तहत आवास आवंटन के तरीकों में भी बदलाव करते हुए सेक ( सामाजिक आर्थिक जातीय गणना) सूची में शामिल गरीबों को आवास देने का प्रावधान किया गया। हालांकि यह योजना पूरी तरह वर्ष 2016-17 में धरातल पर उतरी। सेक डाटा में आवास को लेकर बनी स्थाई प्रतीक्षा सूची में अनुसूचित जाति व जनजाति के किसी लाभार्थी के नहीं होने के कारण वर्ष 19-20 में शासन की ओर से केवल सामान्य वर्ग के लिए आवास उपलब्ध कराए गए। लेकिन यह योजना भी पूर्व की तरह भ्रष्टाचार की शिकार रही और पात्र आज भी भटक रहे हैं। आवंटन से लेकर भुगतान तक में खूब धांधली व बंदरबांट किया गया। आए दिन अधिकारियों के यहां इसकी शिकायतें पहुंची लेकिन हर बार जांच के नाम पर कोरम व लीपापोती की जाती रही। कुछ मामलों को अधिकारियों ने संज्ञान भी लिया तो वह अंजाम तक नहीं पहुंचा और अधिकांश मामले ठंडे बस्ते में पड़े रहे। कुछ मामलों में तो कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हुई। डीआरडीए डीएन दुबे ने बताया कि जो भी शिकायतें मिलती हैं उसकी जांच कराई जाती है। जांच में अपात्र मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही अपात्र से रिकवरी की कार्रवाई भी की जाती है।
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